टीसीएस की कस्टम SoC डिजाइन सेवा से ऑटोमोबाइल चिप विकास को नई गति
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने 17 सितंबर 2026 को कस्टम सिस्टम-ऑन-चिप (SoC) डिजाइन सेवाओं की शुरुआत की। यह सेवा खास तौर पर ऑटोमोबाइल मूल उपकरण निर्माताओं यानी OEMs और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम से जुड़े खिलाड़ियों के लिए तैयार की गई है। इसके जरिए कंपनी सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग, VLSI डिजाइन, हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर को-डिजाइन और सिस्टम वैलिडेशन जैसी क्षमताएं एक साथ उपलब्ध कराएगी।
ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए क्यों अहम है यह कदम
आज के वाहन केवल यांत्रिक मशीनें नहीं रह गए हैं, बल्कि वे सॉफ्टवेयर और चिप्स पर तेजी से निर्भर हो रहे हैं। खासकर सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल्स (SDVs) में वाहन की कई प्रमुख सुविधाएं इलेक्ट्रॉनिक और कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए नियंत्रित होती हैं। ऐसे में कस्टम SoC की जरूरत बढ़ती जा रही है, ताकि कंप्यूट क्षमता को वाहन के सॉफ्टवेयर और फीचर्स के अनुरूप ढाला जा सके।
ऑटोमोबाइल सेमीकंडक्टर का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, कनेक्टेड कारों, ऑटोनॉमस ड्राइविंग सिस्टम और उन्नत सुरक्षा प्रणालियों में होता है। इसी वजह से चिप डिजाइन अब वाहन निर्माण का एक रणनीतिक हिस्सा बन गया है।
SoC और VLSI का तकनीकी महत्व
सिस्टम-ऑन-चिप एक ऐसा इंटीग्रेटेड सर्किट होता है जिसमें प्रोसेसर, मेमोरी और इनपुट-आउटपुट जैसे कई कार्य एक ही चिप पर जोड़े जाते हैं। इससे डिवाइस अधिक कॉम्पैक्ट, तेज और ऊर्जा-कुशल बनते हैं। यही कारण है कि SoC का उपयोग उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर औद्योगिक उपकरणों और संचार प्रणालियों तक में किया जाता है।
VLSI यानी Very Large-Scale Integration सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग का वह क्षेत्र है जिसमें एक ही चिप पर बहुत बड़ी संख्या में ट्रांजिस्टरों को समाहित किया जाता है। कस्टम SoC डिजाइन में यही विशेषज्ञता निर्णायक भूमिका निभाती है।
डिजाइन से वैलिडेशन तक पूरी श्रृंखला
TCS की नई सेवा सिलिकॉन विकास की पूरी प्रक्रिया को कवर करती है। इसमें आर्किटेक्चर, डिजाइन, इंप्लीमेंटेशन, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन, वेरिफिकेशन और वैलिडेशन जैसे चरण शामिल हैं। हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर को-डिजाइन का मतलब है कि चिप हार्डवेयर और एम्बेडेड सॉफ्टवेयर को साथ-साथ विकसित किया जाए, ताकि प्रदर्शन और अनुकूलता दोनों बेहतर हों।
यह मॉडल उन कंपनियों के लिए उपयोगी हो सकता है जो अपने वाहन प्लेटफॉर्म के लिए विशिष्ट जरूरतों के अनुसार चिप विकसित करना चाहती हैं। सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में चिप डिजाइनर, फैब्रिकेशन फर्म, टेस्टिंग कंपनियां और इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन सेवा प्रदाता शामिल होते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- System-on-Chip (SoC) एक ही इंटीग्रेटेड सर्किट में कई इलेक्ट्रॉनिक कार्यों को जोड़ता है।
- VLSI का पूरा नाम Very Large-Scale Integration है और यह चिप डिजाइन का प्रमुख क्षेत्र है।
- OEM का अर्थ Original Equipment Manufacturer होता है, यानी वह कंपनी जो अपने ब्रांड या किसी अन्य ब्रांड के लिए वाहन या पुर्जे बनाती है।
- सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल्स में कई वाहन कार्य सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म के जरिए नियंत्रित होते हैं।
कुल मिलाकर, TCS की यह पहल भारत में ऑटोमोटिव सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है। जैसे-जैसे वाहन अधिक स्मार्ट और सॉफ्टवेयर-आधारित होते जा रहे हैं, कस्टम चिप डिजाइन की मांग भी लगातार बढ़ने की संभावना है।