जोजरी नदी के किनारे निर्माण पर रोक से पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की जोजरी नदी के किनारे 100 मीटर के दायरे में निर्माण और विकास कार्यों पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही नदी की मौजूदा बाढ़ रेखा या प्रवाह पथ के दोनों ओर 500 मीटर के भीतर खतरनाक उद्योगों और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई है। अदालत का यह कदम पश्चिमी राजस्थान में नदी प्रदूषण और बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता के बीच आया है।
जोजरी नदी से जुड़ा मामला क्यों अहम है
यह मामला In Re: 2 Million Lives At Risk, Contamination In Jojari River, Rajasthan शीर्षक से चल रही एक suo motu पर्यावरणीय कार्यवाही का हिस्सा है। अदालत ने 15 सितंबर 2025 को इस पर संज्ञान लिया था, जब जोधपुर, पाली और बालोतरा से जुड़े क्षेत्रों में औद्योगिक प्रदूषण के असर पर ध्यान गया। जोजरी नदी पश्चिमी राजस्थान की उन जलधाराओं में शामिल है, जिन पर औद्योगिक अपशिष्ट और अनियंत्रित विकास का दबाव लंबे समय से बना हुआ है।
निर्माण रोक और वैज्ञानिक सीमांकन की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह रोक तब तक लागू रहेगी, जब तक नदी के High Flood Line और पारिस्थितिक बफर जोन का वैज्ञानिक सीमांकन पूरा नहीं हो जाता। अदालत का तर्क यह है कि बिना औपचारिक और वैज्ञानिक निर्धारण के नदी-तट पर निर्माण, बाढ़ जोखिम और पर्यावरणीय क्षति दोनों को बढ़ा सकता है। इस तरह की अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्रों में आगे होने वाले नुकसान को रोकना है।
राज्य सरकार के लिए प्रशासनिक निर्देश
नदी प्रदूषण से जुड़े मामलों में अदालत ने राजस्थान सरकार को भी निर्देश दिए हैं। 7 अगस्त 2026 को दिए गए आदेश में कहा गया कि राज्य सात दिनों के भीतर Integrated Coordination Group गठित करे, जिसकी अगुवाई मुख्य सचिव करें। इस समूह को जोजरी, बंडी और लूणी नदियों में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए समन्वय करना है। साथ ही, अदालत ने एक स्वतंत्र River Commission या River Rejuvenation Authority स्थापित करने को भी कहा, ताकि प्रदूषित नदी प्रणालियों के पुनर्जीवन पर काम हो सके।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सुप्रीम कोर्ट भारत का सर्वोच्च न्यायिक निकाय है और संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत कार्य करता है।
- Suo motu का अर्थ है कि अदालत किसी औपचारिक याचिका के बिना स्वयं संज्ञान लेकर मामला शुरू करे।
- High Flood Line नदी प्रबंधन में वह स्तर दर्शाती है, जहां तक बाढ़ का पानी पहुंच सकता है।
- नदी पुनर्जीवन प्राधिकरणों का उपयोग भारत में प्रदूषण नियंत्रण, पारिस्थितिक बहाली और बेसिन-स्तरीय समन्वय के लिए किया जाता है।
यह आदेश पश्चिमी राजस्थान की नदियों के संरक्षण, औद्योगिक नियंत्रण और बाढ़-प्रबंधन के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जोजरी, बंडी और लूणी जैसी नदियों पर आने वाले फैसले अब पर्यावरणीय शासन और शहरी-औद्योगिक नियोजन के लिए भी मिसाल बन सकते हैं।