जैसलमेर में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण को नई उम्मीद
राजस्थान के जैसलमेर जिले में 3 और 4 अक्टूबर 2026 को दस कैप्टिव-ब्रेड ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को खुले वातावरण में छोड़ा जाएगा। यह कदम देश की सबसे संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियों में से एक के संरक्षण और पुनर्वास प्रयासों में एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
रामदेवरा और सुदासरी में होगा पहला चरण
यह रिलीज़ डेजर्ट नेशनल पार्क के रामदेवरा और सुदासरी क्षेत्रों में प्रस्तावित है। छोड़े जाने के बाद पक्षियों की गतिविधि, व्यवहार, आवास उपयोग, अनुकूलन और जीवित रहने की क्षमता पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह समझना है कि कैप्टिव-ब्रेड पक्षी प्राकृतिक आवास में कितनी सफलतापूर्वक खुद को ढाल पाते हैं।
कैप्टिव ब्रीडिंग से रिवाइल्डिंग तक
इन पक्षियों को एक संरक्षण प्रजनन केंद्र में पाला गया है और रिलीज़ से पहले विशेष रूप से तैयार टनल में प्रशिक्षण दिया गया। इस तरह की रिवाइल्डिंग ट्रेनिंग का मकसद पक्षियों की मानव पर निर्भरता कम करना और उन्हें खुले आवास की परिस्थितियों के लिए तैयार करना है। इस पूरी पहल की निगरानी वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कर रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, अंतिम तकनीकी आकलन के बाद यह तय होगा कि कितने पक्षियों को सीधे खुले आवास में छोड़ा जाएगा। यानी यह संख्या वैज्ञानिक मूल्यांकन के आधार पर बदल भी सकती है।
थार के घासभूमि संरक्षण से जुड़ा भविष्य
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भारतीय उपमहाद्वीप की घासभूमियों से जुड़ी प्रजाति है और इसे दुनिया के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में गिना जाता है। भारत में यह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित है और IUCN रेड लिस्ट में अत्यंत संकटग्रस्त श्रेणी में दर्ज है।
राजस्थान में इस प्रजाति के संरक्षण को थार मरुस्थल की घासभूमियों के संरक्षण से सीधे जोड़ा जाता है। जैसलमेर का डेजर्ट नेशनल पार्क इस पक्षी के प्रमुख आवासों में शामिल है। इसी कारण रामदेवरा और सुदासरी जैसे क्षेत्र संरक्षण प्रयासों के लिए रणनीतिक रूप से अहम माने जा रहे हैं।
परियोजना की पृष्ठभूमि
इंटीग्रेटेड ग्रेट इंडियन बस्टर्ड कंजर्वेशन प्रोजेक्ट की शुरुआत 2016 में हुई थी। इसके बाद 2019 में राजस्थान में बड़े पैमाने पर संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम शुरू किया गया। रामदेवरा स्थित आधुनिक केंद्र में मार्च 2023 में पहला कैप्टिव-ब्रेड चूजा जन्मा था, जिसे इस कार्यक्रम की एक बड़ी उपलब्धि माना गया।
इस बार होने वाली रिलीज़ केवल एक वन्यजीव कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसमें वैज्ञानिक प्रजनन, आवास संरक्षण और पुनर्वास को एक साथ जोड़ा गया है। वरिष्ठ अधिकारी और भारत तथा विदेश के वन्यजीव विशेषज्ञ भी इस कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ग्रेट इंडियन बस्टर्ड राजस्थान का राज्य पक्षी है।
- यह प्रजाति भारत और पाकिस्तान के शुष्क तथा अर्ध-शुष्क घासभूमि क्षेत्रों में पाई जाती है।
- डेजर्ट नेशनल पार्क राजस्थान के थार मरुस्थल क्षेत्र में स्थित है।
- वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख शोध संस्थान है।
जैसलमेर में होने वाली यह रिलीज़ ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण में एक महत्वपूर्ण परीक्षण साबित हो सकती है। यदि यह प्रयास सफल रहता है, तो यह पश्चिमी राजस्थान में घासभूमि संरक्षण और प्रजाति पुनर्स्थापन के लिए नई दिशा देगा।