जी7 शिखर सम्मेलन से पहले फ्रांस ने भारत को बताया प्रमुख रणनीतिक साझेदार

जी7 शिखर सम्मेलन से पहले फ्रांस ने भारत को बताया प्रमुख रणनीतिक साझेदार

फ्रांस ने 11 जून 2026 को आगामी जी7 शिखर सम्मेलन से पहले भारत को अपनी प्रमुख रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल बताया है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब भारत जी7 की विभिन्न चर्चाओं और ट्रैकों में भाग लेने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 14 जून 2026 तक फ्रांस के नीस शहर की यात्रा करेंगे, जहां उनकी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता निर्धारित है। इसके बाद प्रधानमंत्री 16 से 17 जून 2026 तक एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।

भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी का महत्व

भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत वर्ष 1998 में हुई थी। पिछले लगभग तीन दशकों में दोनों देशों के संबंध रक्षा, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, प्रौद्योगिकी, नवाचार और वैश्विक शासन जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित हुए हैं। फ्रांस यूरोप में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है, जबकि भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में फ्रांस की रणनीतिक सोच का प्रमुख हिस्सा है। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई वैश्विक मुद्दों पर सहयोग को लगातार मजबूत किया है।

जी7 शिखर सम्मेलन और प्रमुख एजेंडा

वर्ष 2026 में जी7 समूह की अध्यक्षता फ्रांस के पास है। जी7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतर-सरकारी मंच है। इसके सदस्य कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका हैं। इसके अतिरिक्त यूरोपीय संघ भी बैठकों में भाग लेता है। इस वर्ष के शिखर सम्मेलन में वैश्विक अस्थिरता के संरचनात्मक कारणों, आर्थिक एवं भू-राजनीतिक असंतुलनों, समाजों की लचीलापन क्षमता, महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखलाओं और पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक संकटों जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। भारत को सभी जी7 ट्रैकों में आमंत्रित साझेदार के रूप में शामिल किया गया है।

रक्षा, नवाचार और परमाणु ऊर्जा सहयोग

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली वार्ता में भविष्य के रक्षा समझौतों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसमें राफेल लड़ाकू विमान से जुड़े सहयोग और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत संभावित रक्षा उत्पादन परियोजनाएं शामिल हो सकती हैं। राफेल एक ट्विन-इंजन बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जिसे फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने विकसित किया है। इसके अलावा दोनों नेता ‘भारत इनोवेट्स’ नामक मंच का उद्घाटन भी करेंगे, जो भारत, फ्रांस और अन्य देशों के स्टार्टअप्स तथा वेंचर कैपिटल निवेशकों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। यह कार्यक्रम भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। साथ ही, नागरिक परमाणु ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। नागरिक परमाणु ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन और अन्य गैर-सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में भारत

हाल के वर्षों में भारत ने जी7 की आउटरीच और साझेदार बैठकों में सक्रिय भूमिका निभाई है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को अक्सर ‘ग्लोबल साउथ’ की प्रमुख आवाज के रूप में देखा जाता है। ग्लोबल साउथ शब्द का उपयोग एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र के विकासशील देशों के लिए किया जाता है। भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति, कूटनीतिक सक्रियता और विकासशील देशों के हितों की वकालत ने उसे वैश्विक निर्णय-निर्माण प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • जी7 के सदस्य देश कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका हैं।
  • भारत और फ्रांस ने वर्ष 1998 में रणनीतिक साझेदारी स्थापित की थी।
  • राफेल लड़ाकू विमान का निर्माण फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन कंपनी करती है।
  • फ्रांस वर्ष 2026 में जी7 समूह की अध्यक्षता कर रहा है।
  • ग्लोबल साउथ में एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र के विकासशील देश शामिल माने जाते हैं।

भारत और फ्रांस के बीच बढ़ता सहयोग दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को नई दिशा दे रहा है। जी7 शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय वार्ताओं के माध्यम से रक्षा, नवाचार, ऊर्जा और वैश्विक शासन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूती मिलने की संभावना है। यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि वैश्विक स्थिरता और बहुपक्षीय कूटनीति के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Originally written on June 11, 2026 and last modified on June 11, 2026.

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