जलवायु विज्ञान को समर्पित कृष्णा अच्युतराव का निधन
भारतीय जलवायु वैज्ञानिक और आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर कृष्णा अच्युतराव का लंबी बीमारी के बाद 62 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे 2007 से आईआईटी दिल्ली से जुड़े थे और लगभग दो दशकों तक शिक्षण, शोध तथा शैक्षणिक प्रशासन में सक्रिय रहे। उनके निधन से देश के जलवायु विज्ञान समुदाय को एक बड़ी क्षति हुई है।
शिक्षा और शोध में मजबूत वैज्ञानिक पहचान
कृष्णा अच्युतराव ने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, पिलानी से स्नातक की डिग्री हासिल की थी और न्यू ऑरलियन्स स्थित ट्यूलन विश्वविद्यालय से पीएचडी की थी। भारत लौटने से पहले वे कैलिफोर्निया के लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लैबोरेटरी में भी कार्यरत रहे। उनकी शैक्षणिक यात्रा भारत और विदेश, दोनों स्तरों पर जलवायु विज्ञान के गहरे अध्ययन से जुड़ी रही।
आईआईटी दिल्ली में संस्थागत योगदान
आईआईटी दिल्ली में उन्होंने फैकल्टी डीन और सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंसेज के प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इसी संस्थान में उन्होंने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर क्लाइमेट चेंज अडाप्टेशन की स्थापना में भी भूमिका निभाई, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और अनुकूलन पर केंद्रित है। उनके काम ने भारत में वायुमंडलीय विज्ञान और जलवायु अध्ययन को अकादमिक मजबूती दी।
आईपीसीसी और वैश्विक जलवायु शोध में भूमिका
अच्युतराव अंतर-सरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल यानी आईपीसीसी की पाँचवीं और छठी आकलन रिपोर्ट में वर्किंग ग्रुप I के प्रमुख लेखकों में शामिल रहे। आईपीसीसी संयुक्त राष्ट्र की वह वैज्ञानिक संस्था है जो जलवायु परिवर्तन के विज्ञान, प्रभावों और प्रतिक्रिया विकल्पों का आकलन करती है। वर्किंग ग्रुप I जलवायु परिवर्तन के भौतिक विज्ञान आधार पर काम करता है, इसलिए इसमें उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती थी।
उनका शोध जलवायु मॉडलों के माध्यम से क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन, जोखिम आकलन और चरम मौसम घटनाओं के कारणों की पहचान पर केंद्रित था। इस तरह का अध्ययन जलवायु एट्रिब्यूशन साइंस और संख्यात्मक जलवायु मॉडलिंग का हिस्सा होता है, जो यह समझने में मदद करता है कि किसी घटना में मानव गतिविधियों और प्राकृतिक कारकों की कितनी भूमिका रही।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आईपीसीसी की स्थापना 1988 में विश्व मौसम विज्ञान संगठन और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने की थी।
- आईपीसीसी का वर्किंग ग्रुप I जलवायु परिवर्तन के भौतिक विज्ञान आधार का अध्ययन करता है।
- आईआईटी दिल्ली का सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंसेज भारत में वायुमंडलीय और जलवायु शोध का प्रमुख केंद्र है।
- जलवायु मॉडल का उपयोग भविष्य की जलवायु स्थितियों, चरम मौसम और क्षेत्रीय बदलावों के अध्ययन में किया जाता है।
कृष्णा अच्युतराव का जीवन और कार्य भारत में जलवायु विज्ञान के अकादमिक और वैश्विक आयामों को जोड़ता है। उनके शोध और संस्थागत योगदान आने वाले वर्षों में भी वैज्ञानिक समुदाय के लिए संदर्भ बने रहेंगे।