गुजरात में समान नागरिक संहिता को मिली मंजूरी, राज्य स्तर पर बड़ा बदलाव
गुजरात की समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 को 2 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई। इसके बाद इसे 1 अक्टूबर 2026 के गुजरात सरकार के असाधारण राजपत्र में गुजरात अधिनियम संख्या 15, 2026 के रूप में अधिसूचित किया गया। यह कदम राज्य में व्यक्तिगत कानूनों के ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
विधेयक से कानून बनने तक की प्रक्रिया
गुजरात विधानसभा ने इस विधेयक को मार्च 2026 में पारित किया था। उस समय सदन में इस पर लगभग सात से आठ घंटे तक चर्चा हुई थी। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के साथ अब यह विधेयक कानूनी रूप ले चुका है, हालांकि इसे लागू करने की तिथि राज्य सरकार अलग से अधिसूचित करेगी।
यूसीसी का अर्थ और संवैधानिक संदर्भ
समान नागरिक संहिता का विचार विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों के लिए एक समान कानून व्यवस्था की बात करता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 इसे राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों में शामिल करता है। इसका अर्थ यह है कि संविधान में इसे एक वांछित लक्ष्य माना गया है, लेकिन यह अभी तक पूरे देश में समान रूप से लागू नहीं है।
गुजरात कानून की प्रमुख बातें
गुजरात का यूसीसी कानून विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और लिव-इन संबंधों के लिए एक साझा कानूनी ढांचा प्रदान करता है। इसमें विवाह का पंजीकरण 60 दिनों के भीतर और लिव-इन संबंधों का पंजीकरण 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य किया गया है। कानून के तहत पंजीकृत लिव-इन संबंधों से जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा। इसके अलावा बहुविवाह और द्विविवाह पर रोक लगाई गई है तथा पुत्र और पुत्री को समान उत्तराधिकार अधिकार दिए गए हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अनुच्छेद 44, भारतीय संविधान के नीति-निर्देशक सिद्धांतों का हिस्सा है और यूसीसी से जुड़ा है।
- उत्तराखंड राज्य स्तर पर समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बना था।
- गुजरात अब व्यापक राज्य-स्तरीय यूसीसी लागू करने वाला दूसरा राज्य बन गया है।
- गुजरात यूसीसी को अधिसूचना के बाद गुजरात अधिनियम संख्या 15, 2026 के रूप में मान्यता मिली है।
- गुजरात यूसीसी के प्रावधानों से अनुसूचित जनजातियों को बाहर रखा गया है।
किस पर लागू होगा और किसे छूट मिली है
इस कानून का एक महत्वपूर्ण पहलू इसका दायरा और छूट है। गुजरात यूसीसी के प्रावधान अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होंगे। यह छूट राज्य में जनजातीय समुदायों की विशिष्ट सामाजिक-परंपरागत व्यवस्था को ध्यान में रखकर दी गई है।
कुल मिलाकर, गुजरात में यूसीसी को मिली मंजूरी राज्य स्तर पर व्यक्तिगत कानूनों के एकरूपकरण की दिशा में बड़ा कदम है। अब निगाहें इस पर रहेंगी कि राज्य सरकार इसे कब से लागू करती है और इसके प्रशासनिक नियम किस तरह तय किए जाते हैं।