कोयला भंडार की कमी से बिजली आपूर्ति पर बढ़ा दबाव
भारत के कोयला आधारित बिजलीघरों में ईंधन की कमी अक्टूबर 2026 में चिंता का विषय बन गई है। 19 अक्टूबर तक देश के 191 कोयला बिजलीघरों में से 96 के पास तीन दिन से कम का कोयला बचा था। सितंबर के मध्य में ऐसे बिजलीघरों की संख्या 60 थी। बढ़ती बिजली मांग, कमजोर मानसून और सीमित कोयला भंडार ने बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है।
कई बिजलीघरों में तीन दिन से कम का भंडार
अक्टूबर की शुरुआत से बिजलीघरों में कोयले का कुल भंडार लगभग 5 प्रतिशत घटा। एक अलग आकलन के अनुसार, 10 अक्टूबर तक अगस्त की शुरुआत के मुकाबले भंडार 45.1 प्रतिशत कम हो चुका था। उस दिन की कोयला खपत के आधार पर उपलब्ध भंडार से करीब 7.7 दिन तक बिजली उत्पादन किया जा सकता था।
इन आंकड़ों को एक ही समय या एक ही पैमाने का नहीं समझना चाहिए। 19 अक्टूबर का आंकड़ा उन बिजलीघरों की संख्या बताता है जिनके पास तीन दिन से कम का ईंधन था, जबकि 10 अक्टूबर का आंकड़ा उस दिन की खपत के आधार पर औसत परिचालन अवधि दर्शाता है। दोनों आंकड़े अलग तारीखों और अलग मापों से जुड़े हैं।
बढ़ी मांग और कमजोर मानसून का असर
2026 में बिजली की दैनिक अधिकतम मांग 2025 की तुलना में लगभग 45 से 50 गीगावाट अधिक रही। सितंबर में बिजली की कमी उस महीने के लिए करीब एक दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। सामान्य से अधिक गर्म मौसम ने बिजली की मांग बढ़ाई। इस गर्मी में अल नीनो की स्थिति का भी योगदान बताया गया है।
अल नीनो मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की सतही जलराशि के समय-समय पर गर्म होने से जुड़ी जलवायु घटना है। दूसरी ओर, कमजोर मानसून के कारण जलविद्युत उत्पादन घटा। जलविद्युत संयंत्र बहते या गिरते पानी से बिजली बनाते हैं, जबकि कोयला संयंत्र कोयला जलाकर भाप तैयार करते हैं और उससे टरबाइन चलाते हैं। इस तरह जलविद्युत उत्पादन में कमी ने उपलब्ध बिजली पर अतिरिक्त दबाव डाला।
आयात के बजाय घरेलू आपूर्ति बढ़ाने पर जोर
सरकार ने बिजलीघरों के लिए कोयला आयात अनिवार्य करने के प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतों और रुपये की कमजोरी से विदेश से कोयला मंगाना महंगा पड़ सकता था। इसके बजाय कोल इंडिया लिमिटेड से उत्पादन बढ़ाने और रेलवे से बिजलीघरों तक कोयले की समय पर ढुलाई सुनिश्चित करने को कहा गया। कोल इंडिया लिमिटेड सरकारी स्वामित्व वाली कोयला उत्पादक कंपनी है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अक्टूबर 2026 के उपलब्ध आंकड़ों में भारत के 191 कोयला आधारित बिजलीघरों का उल्लेख है।
- कोल इंडिया लिमिटेड सरकारी स्वामित्व वाली कोयला उत्पादक कंपनी है।
- अल नीनो मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के सतही जल के आवधिक गर्म होने से जुड़ा है।
- एक गीगावाट एक अरब वाट के बराबर होता है; यह शक्ति की इकाई है, जबकि किलोवाट-घंटा ऊर्जा की इकाई है।
बिजली की बढ़ती मांग के बीच कोयले की उपलब्धता और उसकी समय पर ढुलाई आपूर्ति बनाए रखने के लिए अहम है। आने वाले समय में उत्पादन, परिवहन और बिजलीघरों के भंडार पर करीबी निगरानी जरूरी होगी।