कृष्णा-गोदावरी बेसिन में गैस खोज से बढ़ी तेल इंडिया की संभावनाएं
ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) ने 23 अक्टूबर 2026 को बंगाल की खाड़ी में स्थित कृष्णा-गोदावरी बेसिन के उथले समुद्री क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की खोज की जानकारी दी। यह खोज कंपनी द्वारा संचालित केजी-डीएसएफ/जीएसकेडब्ल्यू/2018 ब्लॉक के मछ्यापुरी संरचना में हुई है।
गोडावरी-1 कुएं में मिले हाइड्रोकार्बन
खोज ब्लॉक के गोडावरी-1 मूल्यांकन कुएं में हुई। यह कुआं पहले से ज्ञात हाइड्रोकार्बन संचय के विस्तार और उसकी विशेषताओं का आकलन करने के लिए खोदा जाता है। कुएं में 2,024 से 2,027 मीटर की गहराई पर हाइड्रोकार्बन की पुष्टि हुई। यह मछ्यापुरी संरचना का ऐसा हिस्सा है जिसका पहले मूल्यांकन नहीं किया गया था।
कुएं का उत्पादन परीक्षण 16 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ। शुरुआती परीक्षण में प्रतिदिन लगभग एक लाख मानक घन मीटर प्राकृतिक गैस का प्रवाह दर्ज किया गया। अधिकतम लगातार प्रवाह दर दो लाख मानक घन मीटर प्रतिदिन रही। इसके साथ लगभग 170 बैरल प्रतिदिन कंडेन्सेट भी मिला। कुएं के मुख पर दबाव 1,815 पाउंड प्रति वर्ग इंच दर्ज किया गया।
परीक्षण के आंकड़ों का महत्व
मानक घन मीटर प्रतिदिन गैस की मात्रा बताने की इकाई है, जिसमें तापमान और दबाव को तय मानकों के अनुसार समायोजित किया जाता है। कंडेन्सेट प्राकृतिक गैस के साथ मिलने वाला तरल हाइड्रोकार्बन है। इसकी एपीआई गुरुत्व माप 60 डिग्री फ़ारेनहाइट पर 55.8 रही। एपीआई गुरुत्व पेट्रोलियम तरल की सापेक्ष घनता बताता है; अधिक मान आम तौर पर हल्के तरल की ओर संकेत करता है।
ये परीक्षण आंकड़े कुएं में गैस और कंडेन्सेट के प्रवाह तथा उनकी विशेषताओं की जानकारी देते हैं। हालांकि, केवल परीक्षण दरों से पूरे क्षेत्र के भंडार या व्यावसायिक उत्पादन का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। 23 अक्टूबर को मछ्यापुरी संरचना के अगले, अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र का परीक्षण करने की तैयारी चल रही थी। अलग-अलग क्षेत्रों के परीक्षण से संरचना के संभावित संसाधनों का आकलन करने में मदद मिल सकती है।
बेसिन और ब्लॉक की पृष्ठभूमि
कृष्णा-गोदावरी बेसिन भारत के पूर्वी तट पर स्थित एक तलछटी बेसिन है। इसका विस्तार कृष्णा और गोदावरी नदियों के डेल्टा क्षेत्रों से लेकर बंगाल की खाड़ी के समुद्री हिस्सों तक है। यह भारत के हाइड्रोकार्बन वाले प्रमुख बेसिनों में शामिल है और इसमें तटवर्ती तथा अपतटीय दोनों क्षेत्र हैं। खोज वाला ब्लॉक ‘डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड’ श्रेणी में आता है और इसका एकमात्र संचालक ओआईएल है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कृष्णा-गोदावरी बेसिन भारत के पूर्वी तट पर है और इसका समुद्री विस्तार बंगाल की खाड़ी में है।
- कृष्णा और गोदावरी नदियां बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।
- ऑयल इंडिया लिमिटेड की स्थापना 1959 में हुई थी और यह पेट्रोलियम क्षेत्र की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है।
- एपीआई गुरुत्व का उपयोग पेट्रोलियम तरल पदार्थों की सापेक्ष घनता व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
मछ्यापुरी संरचना में हुई यह खोज क्षेत्र के हाइड्रोकार्बन मूल्यांकन के लिए नया आंकड़ा उपलब्ध कराती है। अगले क्षेत्र के परीक्षण से इस संरचना की संभावनाओं की अधिक जानकारी मिलेगी।