कूनो से राजस्थान पहुँचा चीता सीसीबी-4, बारां के जंगलों में निगरानी

कूनो से राजस्थान पहुँचा चीता सीसीबी-4, बारां के जंगलों में निगरानी

मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से नर चीता सीसीबी-4 राजस्थान के बारां जिले के जंगलों में पहुँच गया है। वन अधिकारियों के अनुसार, 1 नवंबर 2026 तक वह केलवाड़ा वन क्षेत्र की अंजरोंडा पट्टी में था। कूनो और राजस्थान के वनकर्मी उसकी गतिविधियों पर संयुक्त रूप से नजर रख रहे हैं।

कूनो से बारां तक का सफर

शुक्रवार रात सीसीबी-4 ने मध्य प्रदेश से राजस्थान की ओर करीब 16 किलोमीटर की दूरी तय की। उसने मध्य प्रदेश के कुरकुता गांव से राजस्थान के कुरकुटी क्षेत्र में प्रवेश किया और फिर दुआ, सिलोरी तथा खुशियारा होते हुए अंजरोंडा के जंगल तक पहुँचा। बारां के उप वन संरक्षक विवेकानंद माणिकराव ने उसकी मौजूदगी की पुष्टि की।

चीते की आवाजाही पर कूनो राष्ट्रीय उद्यान और केलवाड़ा वन क्षेत्र की टीमें वास्तविक समय में नजर रख रही हैं। अलग-अलग राज्यों के वनकर्मियों के बीच यह समन्वय इसलिए अहम है क्योंकि वन्यजीवों की आवाजाही प्रशासनिक सीमाओं पर नहीं रुकती। निगरानी से चीते की स्थिति का पता रखने और उसके सुरक्षित विचरण पर ध्यान देने में मदद मिलती है।

सीसीबी-4 और बारां का आवास

सीसीबी-4 की उम्र लगभग ढाई से तीन वर्ष है। वह परियोजना चीता के तीसरे जत्थे के हिस्से के रूप में 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से भारत लाया गया था। सितंबर में उसने भारत में जन्मे नर चीते केएनजी-23 के साथ शिकार का असामान्य गठबंधन बनाया। आम तौर पर नर चीतों के ऐसे समूह में भाई शामिल होते हैं।

बारां के खुले, अर्ध-शुष्क झाड़ीदार वन और घासभूमियां चीते के विचरण के लिए उपयुक्त आवास उपलब्ध कराती हैं। यहां अपेक्षाकृत कम घनी वनस्पति के साथ चीतल, चिंकारा और नीलगाय के बच्चे जैसे शिकार मौजूद हैं। इससे पहले चीते केपी-2 और केपी-3 भी इस क्षेत्र में लंबे समय तक रहे हैं। मादा वीरा और उसका शावक केपीवी-2 भी यहां ठहरे थे और सितंबर 2026 के आखिरी सप्ताह में कूनो लौट गए थे।

वन्यजीव गलियारों के लिए अहम संकेत

सीसीबी-4 की यह यात्रा बताती है कि चीते अपने परिचित ठिकाने से बाहर भी बड़े भूभाग में विचरण कर सकते हैं। बारां जैसे खुले वन क्षेत्र इस फैलाव के लिए संभावित आवास बनते हैं। ऐसे में राज्य की सीमा के दोनों ओर निगरानी और वन विभागों का तालमेल महत्वपूर्ण है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मादा चीते आम तौर पर बड़े क्षेत्र में घूमती हैं, जबकि नर चीते अपेक्षाकृत छोटे इलाके में रहकर अपना क्षेत्र बनाए रखते हैं।
  • हर चीते के शरीर पर धब्बों का अलग पैटर्न होता है, जिससे उसकी पहचान की जा सकती है।
  • शिकार के दौरान चीता पहले लगभग 30 से 200 मीटर की दूरी तक दबे पांव पहुँचता है, फिर तेज दौड़कर शिकार को गिराता है और गले पर काटकर मारता है।
  • नर चीतों के समूह सामान्यतः भाइयों से बनते हैं; सीसीबी-4 और केएनजी-23 का साथ रहना इस लिहाज से असामान्य है।

सीसीबी-4 की आवाजाही पर निगरानी जारी है। बारां में उसकी मौजूदगी कूनो से बाहर चीते के विचरण और राजस्थान के वन क्षेत्रों की भूमिका को रेखांकित करती है।

Originally written on November 2, 2026 and last modified on November 2, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *