कर्नाटक में राशन कार्ड ई-केवाईसी अब घर बैठे
कर्नाटक ने 14 अक्टूबर 2026 से अन्न सेवा मोबाइल ऐप को पूरे राज्य में उपलब्ध करा दिया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और अन्न भाग्य योजना के लाभार्थी अब राशन कार्ड की इलेक्ट्रॉनिक पहचान-पुष्टि यानी ई-केवाईसी घर से कर सकते हैं। इस सुविधा से सत्यापन के लिए उचित मूल्य की दुकान या सरकारी कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी।
अन्न सेवा ऐप से डिजिटल सत्यापन
अन्न सेवा ऐप के जरिए लाभार्थी अपने राशन कार्ड से जुड़े विवरणों का डिजिटल सत्यापन कर सकते हैं। ई-केवाईसी किसी व्यक्ति की पहचान और उससे जुड़े अभिलेखों की इलेक्ट्रॉनिक पुष्टि की प्रक्रिया है। राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अरशद ने 1 अक्टूबर 2026 को यह ऐप शुरू किया था। इसके विकास में राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र और ई-गवर्नेंस विभाग ने सहयोग किया। ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है।
डिजिटल सेवा का उपयोग करने के लिए लाभार्थियों को अन्न सेवा के साथ आधारफेसआरडी और सीएससी ऐप भी चाहिए। घर से सत्यापन की सुविधा खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जिन्हें उचित मूल्य की दुकान तक पहुंचने में कठिनाई होती है। हालांकि, यह सुविधा राशन कार्ड की पात्रता या योजना के नियमों को बदलती नहीं है; इसका उद्देश्य सत्यापन की प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से पूरा करना है।
पायलट के बाद राज्यव्यापी विस्तार
राज्यव्यापी उपलब्धता से पहले 1 से 12 अक्टूबर तक आठ जिलों में इस ऐप का परीक्षण किया गया। इस पायलट चरण में 1,60,267 लाभार्थियों ने ऐप के माध्यम से ई-केवाईसी पूरी की। 12 अक्टूबर 2026 तक कर्नाटक के कुल 2,67,64,276 लाभार्थियों में से 2,06,76,278 का सत्यापन पूरा हो चुका था। इन आंकड़ों के अनुसार, उस तारीख तक बड़ी संख्या में लाभार्थियों की ई-केवाईसी अभी बाकी थी।
राज्य ने सभी लाभार्थियों के लिए प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा 20 अक्टूबर 2026 तय की है। जिन लोगों ने एक वर्ष से अधिक पहले ई-केवाईसी कराई थी, उन्हें भी इसे दोबारा पूरा करना होगा। इसलिए पहले सत्यापन करा चुके लाभार्थियों को भी यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि उनका रिकॉर्ड स्वतः अद्यतन है। समयसीमा निकट होने के कारण लाभार्थियों के लिए अपनी स्थिति जांचना और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करना महत्वपूर्ण है।
पीडीएस और राशन कार्ड की भूमिका
भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली निर्धारित खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुएं उचित मूल्य की दुकानों के नेटवर्क के माध्यम से पात्र लोगों तक पहुंचाती है। राशन कार्ड पात्र परिवारों की पहचान और उन्हें मिलने वाले लाभों का रिकॉर्ड रखने में मदद करता है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 पात्र परिवारों को रियायती खाद्यान्न पाने का कानूनी आधार देता है। अन्न भाग्य कर्नाटक की खाद्य सुरक्षा योजना है, जो पीडीएस लाभार्थियों से जुड़ी है। इस व्यवस्था में राशन कार्ड का सत्यापन लाभार्थी और उसके दर्ज विवरणों की पुष्टि के लिए अहम है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम वर्ष 2013 में बनाया गया था।
- पीडीएस के तहत खाद्यान्न वितरण उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से होता है।
- राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र सरकारी प्रशासन को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी संबंधी सहायता देता है।
- अन्न सेवा ऐप का राज्यव्यापी विस्तार आठ जिलों में हुए पायलट के बाद 14 अक्टूबर 2026 को हुआ।
अन्न सेवा से कर्नाटक ने राशन कार्ड सत्यापन को घर तक पहुंचाने का डिजिटल विकल्प दिया है। लाभार्थियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर ई-केवाईसी पूरी करने के साथ यह भी ध्यान रखना होगा कि एक वर्ष से पुराने सत्यापन को फिर से कराना आवश्यक है।