जहाज निर्माण को भुगतान जोखिम से बचाएगी नई बीमा पहल
केंद्र सरकार ने देश के जहाज निर्माण उद्योग को भुगतान में चूक और देरी से जुड़े जोखिमों से बचाने के लिए दो ऋण जोखिम बीमा उत्पाद शुरू किए हैं। केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 13 अक्टूबर 2026 को मुंबई में समुद्री राज्य विकास परिषद की 21वीं बैठक के दौरान इनकी घोषणा की। दोनों उत्पाद निर्यात और घरेलू जहाज निर्माण परियोजनाओं के लिए अलग-अलग सुरक्षा व्यवस्था प्रदान करते हैं।
निर्यात और घरेलू परियोजनाओं के लिए अलग बीमा
निर्यात जहाज निर्माण परियोजनाओं के लिए ‘जहाज निर्माण परियोजना ऋण जोखिम बीमा पॉलिसी’ (एसबीपीसीपी) तैयार की गई है। इसे ईसीजीसी लिमिटेड ने विकसित किया है। घरेलू जहाज निर्माण परियोजनाओं के लिए ‘बिजनेस क्रेडिट शील्ड पॉलिसी शिपबिल्डर्स’ (बीसीएसपीएस) बनाई गई है, जिसे न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने विकसित किया है।
ऋण जोखिम बीमा का उद्देश्य खरीदार या देनदार की ओर से भुगतान न किए जाने पर होने वाले तय नुकसान से सुरक्षा देना है। जहाज निर्माण परियोजनाएं बड़े वित्तीय निवेश और लंबी अवधि से जुड़ी होती हैं। ऐसे में भुगतान में देरी या चूक से शिपयार्ड पर आर्थिक दबाव पड़ सकता है। इन बीमा उत्पादों के जरिए परियोजनाओं में भुगतान जोखिम को संभालने में मदद मिलेगी।
केंद्र सरकार इन पॉलिसियों के प्रीमियम पर सब्सिडी देगी। यदि शिपयार्ड बीमा दावा करते हैं, तो सरकार बीमा कंपनियों को प्रत्यक्ष सहायता भी देगी। इन व्यवस्थाओं का मकसद शिपयार्डों को भुगतान संबंधी अनिश्चितताओं और वैश्विक बाजार में बदलाव के बीच जहाज निर्माण परियोजनाएं आगे बढ़ाने में सहारा देना है।
69,725 करोड़ रुपये के समुद्री पैकेज का हिस्सा
दोनों बीमा उत्पाद 69,725 करोड़ रुपये के जहाज निर्माण और समुद्री क्षेत्र पैकेज के अंतर्गत विकसित किए गए हैं। इस पैकेज में 19,989 करोड़ रुपये की जहाज निर्माण विकास योजना शामिल है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2025 में इस योजना को मंजूरी दी थी। यही योजना इन बीमा उत्पादों को तैयार करने का आधार बनी।
निर्यात और घरेलू परियोजनाओं के लिए अलग पॉलिसियां होने से दोनों क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप भुगतान जोखिम का प्रबंधन किया जा सकेगा। इससे जहाज निर्माण उद्योग को बड़े अनुबंधों में वित्तीय अनिश्चितता से निपटने के लिए संस्थागत सहायता मिलेगी। हालांकि, पॉलिसियों के तहत कवर होने वाले नुकसान और दावों की विस्तृत शर्तें संबंधित बीमा उत्पादों के नियमों पर निर्भर करेंगी।
समुद्री राज्य विकास परिषद की वैधानिक भूमिका
समुद्री राज्य विकास परिषद केंद्र सरकार और समुद्री राज्यों के बीच बंदरगाहों तथा समुद्री क्षेत्र से जुड़े विषयों पर समन्वय का मंच है। मुंबई में हुई इसकी 21वीं बैठक भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 2025 के तहत परिषद की पहली बैठक थी, जब परिषद ने वैधानिक निकाय के रूप में कार्य किया। इस अधिनियम को 15 मई 2026 को अधिसूचित किया गया था।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
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- निर्यात जहाज निर्माण परियोजनाओं के लिए एसबीपीसीपी को ईसीजीसी लिमिटेड ने विकसित किया है।
- घरेलू परियोजनाओं के लिए बीसीएसपीएस न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने विकसित की है।
- 19,989 करोड़ रुपये की जहाज निर्माण विकास योजना, 69,725 करोड़ रुपये के समुद्री पैकेज का हिस्सा है।
- भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 2025 को 15 मई 2026 को अधिसूचित किया गया था।
नई बीमा व्यवस्थाएं जहाज निर्माण परियोजनाओं में भुगतान जोखिम को सीमित करने की दिशा में सरकारी समर्थन उपलब्ध कराती हैं। इनका प्रभाव निर्यात और घरेलू शिपयार्डों की वित्तीय स्थिरता पर महत्वपूर्ण हो सकता है।