कर्नाटक की नई वस्त्र नीति से निवेश और रोजगार को नई रफ्तार

कर्नाटक की नई वस्त्र नीति से निवेश और रोजगार को नई रफ्तार

कर्नाटक सरकार ने 30 सितंबर 2026 को अपनी वस्त्र एवं परिधान नीति (4.0) 2026-31 को अधिसूचित कर दिया। पांच साल की इस नीति के लिए 4,000 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। सरकार का लक्ष्य 20,000 करोड़ रुपये का घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित करना तथा वस्त्र क्षेत्र में 5 लाख रोजगार सृजित करना है।

नीति का दायरा और औद्योगिक फोकस

यह नीति 30 सितंबर 2026 से प्रभावी होगी और नई वस्त्र नीति आने तक या पांच वर्ष पूरे होने तक लागू रहेगी। वस्त्र नीति का सामान्य उद्देश्य उत्पादन, प्रसंस्करण, निर्यात, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना होता है। कर्नाटक ने इस बार नीति को केवल बड़े शहरों तक सीमित न रखकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में औद्योगिक विस्तार का आधार बनाया है।

सरकार ने 34 फोकस्ड तालुकों की पहचान की है, जहां पात्र नई वस्त्र और परिधान इकाइयों को अतिरिक्त प्रोत्साहन और छूट मिलेंगी। साथ ही, कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं ताकि निवेश का लाभ अधिक संतुलित तरीके से राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचे।

रेशम, तकनीकी वस्त्र और पीएम मित्र पार्क पर जोर

इस नीति की एक खास बात यह है कि पहली बार इसमें रेशम धागा उत्पादन, रेशम रीलिंग और स्पिनिंग को भी शामिल किया गया है। रेशम रीलिंग वह प्रक्रिया है जिसमें कोकून से रेशमी तंतुओं को निकाला जाता है, जबकि स्पिनिंग में रेशों को धागे में बदला जाता है। कर्नाटक रेशम उत्पादन के लिए पहले से ही जाना जाता है, इसलिए यह प्रावधान राज्य की मौजूदा क्षमता को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

नीति में कलबुर्गी स्थित पीएम मित्र पार्क में पात्र इकाइयों के लिए विशेष प्रोत्साहन भी दिए जाएंगे। पीएम मित्र का पूरा नाम प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल पार्क है। यह केंद्र सरकार की एकीकृत वस्त्र अवसंरचना योजना है, जिसका उद्देश्य उत्पादन, प्रसंस्करण और लॉजिस्टिक्स को एक ही स्थान पर जोड़ना है।

रोजगार, निर्यात और सतत उत्पादन पर फोकस

कर्नाटक की नई नीति में वस्त्र उत्पादन, तकनीकी वस्त्र, हथकरघा, कौशल विकास, निर्यात और सतत विनिर्माण को प्राथमिकता दी गई है। तकनीकी वस्त्र वे उत्पाद होते हैं जिनका उपयोग कपड़ों के बजाय कार्यात्मक उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जैसे चिकित्सा वस्त्र और भू-वस्त्र। हथकरघा पारंपरिक वस्त्र उत्पादन की वह विधि है जिसमें हाथ से चलने वाले करघे का उपयोग होता है।

वस्त्र क्षेत्र श्रम-प्रधान होने के कारण रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी वजह से राज्य सरकार ने निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ मूल्य श्रृंखला के विकास पर भी जोर दिया है, ताकि रेशम, परिधान और तकनीकी वस्त्रों से जुड़े उद्योगों को एक व्यापक औद्योगिक आधार मिल सके।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • कर्नाटक भारत के प्रमुख रेशम उत्पादक राज्यों में शामिल है और यहां रेशम उत्पादन की मजबूत परंपरा है।
  • पीएम मित्र पार्क का उद्देश्य वस्त्र उद्योग के लिए एकीकृत अवसंरचना उपलब्ध कराना है।
  • तकनीकी वस्त्रों का उपयोग सामान्य परिधान के बजाय विशेष कार्यों में होता है, जैसे स्वास्थ्य और निर्माण क्षेत्र।
  • तालुक भारत के कई राज्यों में राजस्व और स्थानीय प्रशासन की एक प्रशासनिक इकाई होती है।

कुल मिलाकर, यह नीति कर्नाटक को वस्त्र और परिधान निवेश के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। रेशम, तकनीकी वस्त्र और क्षेत्रीय प्रोत्साहनों के संयोजन से राज्य को औद्योगिक विस्तार और रोजगार दोनों में लाभ मिलने की उम्मीद है।

Originally written on October 1, 2026 and last modified on October 1, 2026.

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