ऑक्सीजन टक्करों से शुरुआती ब्रह्मांड के पदार्थ के संकेत
रिलेटिविस्टिक हेवी आयन कोलाइडर (आरएचआईसी) में ऑक्सीजन नाभिकों की टक्कर के अध्ययन से क्वार्क-ग्लूऑन प्लाज़्मा बनने के प्रमाण मिले हैं। यह अत्यंत गर्म और सघन पदार्थ की वह अवस्था है, जो महाविस्फोट के तुरंत बाद मौजूद थी। निष्कर्ष बताते हैं कि अपेक्षाकृत छोटे टक्कर तंत्र में भी इस अवस्था की पहचान की जा सकती है।
छोटी टक्कर में प्लाज़्मा के प्रमाण
ब्रुकहेवन राष्ट्रीय प्रयोगशाला में स्थित आरएचआईसी के स्टार प्रयोग के वैज्ञानिकों ने 30 अक्टूबर 2026 को इन नतीजों की जानकारी दी। विश्लेषण 2021 में दर्ज ऑक्सीजन-ऑक्सीजन टक्कर के आँकड़ों पर आधारित था। इन टक्करों की ऊर्जा 200 अरब इलेक्ट्रॉन-वोल्ट थी। अध्ययन के प्रमुख विश्लेषण का नेतृत्व शानदोंग विश्वविद्यालय के ली यी ने किया। निष्कर्ष ‘फिजिकल रिव्यू लेटर्स’ में प्रकाशित हुए।
वैज्ञानिकों ने उच्च ऊर्जा वाले कणों की संख्या में लगभग 20 प्रतिशत कमी देखी। इसे ‘जेट क्वेंचिंग’ का संकेत माना गया। इसमें तेज गति से निकलने वाले कणों के समूह घने माध्यम से गुजरते हुए ऊर्जा खो देते हैं। यह ऊर्जा-हानि उस माध्यम की मौजूदगी का पता लगाने में मदद करती है, जिसमें क्वार्क और ग्लूऑन मुक्त अवस्था में होते हैं।
ऊर्जा की सीमा समझने में मदद
इससे पहले क्वार्क-ग्लूऑन प्लाज़्मा के प्रमाण भारी नाभिकों की टक्करों या यूरोपीय परमाणु अनुसंधान केंद्र के एलएचसी में अधिक ऊर्जा वाली ऑक्सीजन टक्करों से मिले थे। एलएचसी में टक्कर ऊर्जा 5,000 अरब इलेक्ट्रॉन-वोल्ट से अधिक होती है। आरएचआईसी के नए परिणाम छोटे टक्कर तंत्र में प्लाज़्मा बनने के लिए जरूरी ऊर्जा की निचली सीमा समझने में मदद करते हैं।
आरएचआईसी ने वर्ष 2000 से काम किया और अपना अंतिम संचालन दौर पूरा किया। इसके स्टार और एसफेनिक्स संसूचकों ने 6 फरवरी 2026 को ऑक्सीजन-ऑक्सीजन टक्कर के आँकड़े दर्ज किए। स्टार के भौतिक विज्ञानी रोंगरोंग मा के अनुसार, छोटे टक्कर तंत्रों का अध्ययन वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करता है कि प्लाज़्मा बनने के लिए किन परिस्थितियों की जरूरत होती है।
कणों की ऊर्जा-हानि से क्या पता चलता है
प्लाज़्मा में क्वार्क सामान्य पदार्थ की तरह एक-दूसरे से बँधे नहीं रहते, बल्कि मुक्त अवस्था में होते हैं। हालांकि, प्रयोगों में मूल क्वार्क या ग्लूऑन को सीधे नहीं देखा जाता। ये कण तेजी से हैड्रॉन बनाते हैं और संसूचक इन्हीं परिणामी कणों को दर्ज करते हैं। प्लाज़्मा से गुजरते समय कणों की ऊर्जा टक्करों और उससे उत्पन्न विकिरण के कारण घटती है; इस प्रक्रिया में माध्यम से प्रेरित ग्लूऑन विकिरण प्रमुख भूमिका निभाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- क्वार्क-ग्लूऑन प्लाज़्मा में क्वार्क मुक्त अवस्था में होते हैं; सामान्य पदार्थ में वे बँधे रहते हैं।
- जेट क्वेंचिंग में ऊर्जावान कणों के समूह घने माध्यम से गुजरते हुए ऊर्जा खोते हैं।
- इस ऊर्जा-हानि में टक्करों के साथ माध्यम से प्रेरित ग्लूऑन विकिरण भी शामिल होता है।
- प्रयोग सीधे मूल क्वार्क या ग्लूऑन नहीं, बल्कि उनसे बने हैड्रॉन दर्ज करते हैं।
ऑक्सीजन टक्करों के ये निष्कर्ष शुरुआती ब्रह्मांड जैसी पदार्थ-अवस्था को समझने के लिए एक नया तुलनात्मक आधार देते हैं और बताते हैं कि छोटे टक्कर तंत्रों का अध्ययन भी अहम है।