असम में देश का पहला सरकारी प्रोटॉन थेरेपी केंद्र
असम सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 को बेल्जियम की कंपनी आयन बीम एप्लिकेशंस (आईबीए) पार्टिकल्स के साथ गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में देश का पहला सार्वजनिक क्षेत्र का प्रोटॉन बीम थेरेपी केंद्र स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह केंद्र कैंसर के उन्नत उपचार को अधिक लोगों तक पहुंचाने की राज्य की योजना का हिस्सा है।
600 करोड़ रुपये की परियोजना और वित्तपोषण
केंद्र की अनुमानित लागत 600 करोड़ रुपये है। इसमें विश्व बैंक से 315 करोड़ रुपये का ऋण और असम सरकार की ओर से 285 करोड़ रुपये का योगदान शामिल है। परियोजना को चालू होने में कम से कम तीन वर्ष लगने का अनुमान है। असम मंत्रिमंडल ने अगस्त 2026 में असम राज्य द्वितीयक स्वास्थ्य सेवा पहल (एएसएसआईएसटी) के अंतर्गत इस केंद्र को मंजूरी दी थी।
यह भारत में प्रोटॉन बीम थेरेपी की तीसरी सुविधा होगी। इससे पहले मुंबई के टाटा कैंसर अस्पताल और चेन्नई के अपोलो अस्पताल में निजी क्षेत्र के केंद्र स्थापित हैं। निजी केंद्रों में इस उपचार का खर्च 50 लाख रुपये तक हो सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र में सुविधा शुरू होने से उन्नत उपचार की उपलब्धता और वहन-क्षमता बढ़ाने की उम्मीद है।
प्रोटॉन थेरेपी में क्या है खास
प्रोटॉन थेरेपी में कैंसरग्रस्त हिस्से तक विकिरण पहुंचाने के लिए प्रोटॉन कणों की किरण का उपयोग किया जाता है। इसकी एक अहम विशेषता यह है कि प्रोटॉन अपनी ऊर्जा का सबसे बड़ा हिस्सा लक्ष्य के भीतर एक निश्चित गहराई पर छोड़ते हैं। इसे ब्रैग पीक कहा जाता है। लक्ष्य के आगे विकिरण की मात्रा बहुत कम हो सकती है, जिससे आसपास के स्वस्थ ऊतकों को बचाने में मदद मिलती है।
बच्चों के कैंसर उपचार में यह विशेषता महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि उनके विकसित होते सामान्य ऊतकों पर विकिरण का असर सीमित रखने की जरूरत होती है। पेंसिल-बीम स्कैनिंग तकनीक में चुंबकों की मदद से पतली प्रोटॉन किरणों को नियंत्रित किया जाता है और ट्यूमर की परतों पर क्रमशः उपचार किया जाता है। इससे लक्ष्य को सटीक रूप से कवर करने में मदद मिलती है।
असम के कैंसर उपचार ढांचे का विस्तार
असम में कैंसर उपचार की सुविधाओं का विस्तार जारी है। राज्य में नियोजित 17 कैंसर अस्पतालों में से 12 पहले से कार्यरत हैं। गुवाहाटी में प्रस्तावित प्रोटॉन केंद्र इस नेटवर्क में उन्नत उपचार की सुविधा जोड़ेगा। इसका विशेष लाभ उन मरीजों को मिल सकता है जिन्हें विकिरण उपचार की जरूरत है, खासकर बच्चों को; हालांकि उपचार का चयन मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार होगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ब्रैग पीक वह बिंदु है जहां प्रोटॉन किरण अपनी अधिकतम ऊर्जा लक्ष्य ऊतक में जमा करती है।
- पेंसिल-बीम स्कैनिंग में चुंबकों से पतली प्रोटॉन किरणों को दिशा देकर ट्यूमर की परतों का उपचार किया जाता है।
- प्रोटॉन थेरेपी में लक्ष्य के आगे विकिरण की मात्रा कम होने से आसपास के ऊतकों को बचाने में मदद मिल सकती है।
- असम के 17 नियोजित कैंसर अस्पतालों में से 12 कार्यरत हैं।
असम की यह परियोजना उन्नत कैंसर उपचार को सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। केंद्र का वास्तविक लाभ इसकी समय पर शुरुआत और मरीजों के लिए उपचार की पहुंच पर निर्भर करेगा।