एसएमई ग्रोथ फंड से छोटे उद्योगों को मिलेगा दीर्घकालिक पूंजी सहारा

एसएमई ग्रोथ फंड से छोटे उद्योगों को मिलेगा दीर्घकालिक पूंजी सहारा

केंद्र सरकार ने छोटे और मध्यम उद्यमों को विस्तार, तकनीकी उन्नयन और वैश्विक बाजारों तक पहुंच दिलाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई ग्रोथ फंड को मंजूरी दी है। यह फंड उन व्यवहार्य और विस्तार योग्य उद्यमों के लिए बनाया गया है, जिन्हें त्वरित लाभ नहीं बल्कि लंबी अवधि की जोखिम पूंजी की जरूरत होती है।

फंड का ढांचा और उद्देश्य

यह फंड एक वैकल्पिक निवेश कोष के माध्यम से काम करेगा। इसका मुख्य लक्ष्य ऐसे एसएमई को इक्विटी आधारित सहायता देना है, जो शुरुआती चरण से आगे बढ़ चुके हैं और अब उत्पादन क्षमता, बाजार विस्तार या तकनीकी बदलाव के लिए पूंजी चाहते हैं। सरकार का मानना है कि इस तरह की patient capital यानी धैर्यपूर्ण दीर्घकालिक पूंजी, छोटे उद्योगों को स्थिर और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ा सकती है।

यह पहल बजट 2026-27 में घोषित की गई थी और अब इसे औपचारिक मंजूरी मिल गई है। फंड का उपयोग विनिर्माण, सेवाओं, प्रौद्योगिकी, नवाचार-आधारित क्षेत्रों और रणनीतिक मूल्य शृंखलाओं से जुड़े उद्यमों के लिए किया जाएगा।

किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

इस फंड से एसएमई को उत्पादन क्षमता बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने, विदेशी बाजारों में प्रवेश करने, अधिग्रहण करने और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से जुड़ने में मदद मिलेगी। सरकार ने संकेत दिया है कि आवंटन का बड़ा हिस्सा विनिर्माण-आधारित एसएमई को दिया जाएगा, क्योंकि यही क्षेत्र रोजगार और निर्यात दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। ये न केवल बड़े पैमाने पर रोजगार देते हैं, बल्कि औद्योगिक उत्पादन और निर्यात में भी अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यह फंड उन उद्यमों के लिए खास है, जो बढ़ने की क्षमता रखते हैं लेकिन लंबी अवधि की पूंजी की कमी से जूझते हैं।

एमएसएमई क्षेत्र की आर्थिक अहमियत

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एमएसएमई क्षेत्र भारत के विनिर्माण उत्पादन में लगभग 35.4 प्रतिशत, निर्यात में 48.6 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद में 31.1 प्रतिशत योगदान देता है। यह क्षेत्र 328.2 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार देता है और गैर-कृषि रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है।

भारत में एमएसएमई की परिभाषा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 के तहत तय की गई है। यह क्षेत्र विनिर्माण और सेवा, दोनों प्रकार की गतिविधियों को शामिल करता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एसएमई ग्रोथ फंड का आकार 10,000 करोड़ रुपये है।
  • यह फंड एक वैकल्पिक निवेश कोष के माध्यम से संचालित होगा।
  • इसकी घोषणा बजट 2026-27 में की गई थी।
  • एमएसएमई क्षेत्र भारत के निर्यात में 48.6 प्रतिशत और जीडीपी में 31.1 प्रतिशत योगदान देता है।

कुल मिलाकर, यह फैसला छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि विस्तार और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का एक रणनीतिक कदम है। इससे उन कंपनियों को नई गति मिलने की उम्मीद है जो आगे बढ़ने की क्षमता रखती हैं, लेकिन लंबी अवधि की पूंजी तक सीमित पहुंच के कारण रुक जाती हैं।

Originally written on October 6, 2026 and last modified on October 6, 2026.

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