एशियाई खेलों में भारतीय तीरंदाजों ने रचा इतिहास, कंपाउंड मिक्स्ड टीम में स्वर्ण
भारतीय तीरंदाज चिकीथा तनीपर्थी और साहिल जाधव ने 30 सितंबर 2026 को जापान के आइची-नागोया में हुए एशियाई खेलों में कंपाउंड मिक्स्ड टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीत लिया। इस जीत के साथ भारत ने इस इवेंट में लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक के लिए कोटा भी हासिल कर लिया, जहां कंपाउंड तीरंदाजी पहली बार ओलंपिक कार्यक्रम का हिस्सा बनने जा रही है।
कड़े फाइनल में भारत ने शूट-ऑफ से बाजी मारी
फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जिसमें भारतीय जोड़ी का सामना दक्षिण कोरिया की पार्क जियोंग-युन और चोई योंगही से हुआ। निर्धारित 16 तीरों के बाद स्कोर 157-157 से बराबर रहा। इसके बाद हुए शूट-ऑफ में भारत ने 20-19 से जीत दर्ज की और स्वर्ण अपने नाम किया।
मिक्स्ड टीम फॉर्मेट में एक ही देश के एक पुरुष और एक महिला तीरंदाज साथ उतरते हैं। यह प्रारूप दबाव, तालमेल और सटीकता की असली परीक्षा माना जाता है।
कंपाउंड तीरंदाजी क्यों खास है
कंपाउंड तीरंदाजी में पुली और केबल वाले विशेष धनुष का इस्तेमाल होता है। यह रिकर्व धनुष की तुलना में तीरंदाज को कम खिंचाव बल के साथ निशाना साधने में मदद करता है। इसी वजह से यह स्पर्धा तकनीक, स्थिरता और निरंतरता पर बहुत अधिक निर्भर करती है।
यह शैली विश्व और महाद्वीपीय स्तर की प्रतियोगिताओं में लंबे समय से लोकप्रिय रही है, लेकिन अब ओलंपिक में इसकी एंट्री इसे और अधिक वैश्विक पहचान देगी।
भारत के लिए उपलब्धि और प्रेरणा दोनों
इस स्वर्ण पदक ने एशियाई खेल 2026 में भारत की पदक तालिका को और मजबूत किया। 30 सितंबर तक भारत के खाते में 54 पदक हो चुके थे, जिनमें 8 स्वर्ण, 21 रजत और 25 कांस्य शामिल थे।
चिकीथा तनीपर्थी ने उसी दिन एशियाई खेलों में अपना दूसरा स्वर्ण भी जीता, जबकि साहिल जाधव की सफलता के पीछे भी बड़ा पारिवारिक त्याग जुड़ा है। चिकीथा के पिता ने उनकी ट्रेनिंग के लिए परिवार की धान काटने वाली मशीन बेची थी, जबकि साहिल की मां ने नया कंपाउंड धनुष खरीदने के लिए अपने गहने बेचे थे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एशियाई खेलों का आयोजन ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया करती है।
- कंपाउंड तीरंदाजी लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक में पहली बार शामिल होगी।
- तीरंदाजी में शूट-ऑफ तब कराया जाता है जब निर्धारित राउंड के बाद स्कोर बराबर हो जाए।
- मिक्स्ड टीम इवेंट में एक ही देश के एक पुरुष और एक महिला तीरंदाज साथ खेलते हैं।
यह जीत सिर्फ एक स्वर्ण पदक नहीं, बल्कि भारतीय तीरंदाजी की बढ़ती ताकत और ओलंपिक स्तर पर नई संभावनाओं का संकेत भी है।