एनसीआर प्रदूषण नियंत्रण के लिए GRAP में बड़ा बदलाव
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP की रूपरेखा में संशोधन को मंजूरी दी है। 28 सितंबर 2026 को स्वीकृत इस संशोधित व्यवस्था में कुल 48 कार्रवाइयाँ शामिल हैं, जिन्हें चार चरणों में बाँटा गया है। इसका उद्देश्य वाहन उत्सर्जन, धूल नियंत्रण और अन्य प्रदूषण-रोधी उपायों को अधिक व्यवस्थित और तेज़ बनाना है।
चार चरणों में नई कार्रवाई व्यवस्था
GRAP एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीरता के अनुसार लागू होने वाला आपातकालीन ढांचा है। इसमें अब चरणवार कार्रवाई को और स्पष्ट किया गया है। संशोधित सूची में स्टेज I के तहत 25, स्टेज II के तहत 8, स्टेज III के तहत 10 और स्टेज IV के तहत 5 कार्रवाइयाँ रखी गई हैं। इससे यह तय करना आसान होगा कि हवा की गुणवत्ता बिगड़ने पर किस स्तर पर कौन-से प्रतिबंध लागू होंगे।
संशोधन के तहत डीज़ल जनरेटर सेटों के संचालन और एनसीआर व आसपास के राज्यों से आने वाली BS-IV और उससे नीचे की बसों से जुड़े कुछ उपायों को स्टेज II से स्टेज I में स्थानांतरित किया गया है। इसका अर्थ है कि इन मुद्दों पर अब पहले चरण से ही निगरानी और कार्रवाई शुरू हो सकेगी।
वाहनों और धूल पर सख्ती
नए प्रावधानों में वाहन प्रदूषण पर विशेष ध्यान दिया गया है। स्टेज III के तहत BS-III पेट्रोल और BS-IV डीज़ल या उससे नीचे मानक वाले हल्के मोटर वाहनों पर प्रतिबंध अब सोनीपत तक भी लागू होंगे। पहले यह व्यवस्था गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाज़ियाबाद और गौतम बुद्ध नगर तक सीमित थी।
इसके अलावा, आवश्यक वस्तुएँ ले जाने वाले BS-IV और उससे नीचे मानक वाले मालवाहक वाहनों को दी गई छूट को भी सीमित किया गया है। स्टेज III में हल्के और मध्यम मालवाहक वाहनों तथा स्टेज IV में भारी मालवाहक वाहनों के लिए यह छूट हटाई गई है। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारी और पुराने वाहनों से निकलने वाला धुआँ वायु गुणवत्ता को तेज़ी से प्रभावित करता है।
CAQM ने निर्माण एवं विध्वंस स्थलों पर धूल नियंत्रण उपायों की वेब-पोर्टल आधारित निगरानी को भी एनसीआर की नगरपालिका सीमाओं से बाहर तक बढ़ाने का फैसला किया है। साथ ही, धूल नियंत्रण, ठोस कचरा प्रबंधन और परिवहन से जुड़े दोहराए जाने वाले उपायों को स्टेज I में समेकित किया गया है, ताकि प्रशासनिक कार्रवाई अधिक सरल और प्रभावी हो सके।
नागरिकों के लिए भी बदले नियम
संशोधित GRAP के तहत हर चरण के लिए नागरिकों के चार्टर में भी बदलाव किए गए हैं। इसमें अतिरिक्त Do’s and Don’ts जोड़े गए हैं, ताकि आम लोग भी प्रदूषण नियंत्रण में अपनी भूमिका बेहतर ढंग से निभा सकें। यह पहल केवल सरकारी एजेंसियों तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिक व्यवहार को भी वायु गुणवत्ता सुधार की रणनीति का हिस्सा बनाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- CAQM का पूरा नाम Commission for Air Quality Management in National Capital Region and Adjoining Areas है।
- GRAP का उपयोग एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीरता के अनुसार चरणबद्ध कार्रवाई के लिए किया जाता है।
- BS मानक भारत में वाहनों के लिए लागू Bharat Stage emission standards को दर्शाते हैं।
- निर्माण एवं विध्वंस स्थल शहरी धूल प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में गिने जाते हैं।
संशोधित GRAP से उम्मीद है कि प्रदूषण बढ़ने पर कार्रवाई पहले से अधिक तेज़, स्पष्ट और क्षेत्र-विशेष होगी। एनसीआर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह बदलाव वायु गुणवत्ता प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।