उत्तराखंड में ग्लेशियल झीलों की निगरानी को नई सुरक्षा कवच
उत्तराखंड ने चमोली जिले की वसुधारा ताल में अपनी पहली ग्लेशियल झील प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली लगानी शुरू कर दी है। यह पहल हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ जैसी आपदाओं के खतरे को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस परियोजना को वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के नेतृत्व में 22 वैज्ञानिकों की टीम, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, रुड़की के सहयोग से, उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राष्ट्रीय GLOF जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम के तहत लागू कर रही है।
वसुधारा ताल क्यों है अहम
वसुधारा ताल को उत्तराखंड की उन ग्लेशियल झीलों में शामिल किया गया है जिन्हें उच्च जोखिम वाला माना गया है। हिमालयी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऐसी झीलों के किनारे प्राकृतिक रूप से बने मलबे के बांध, बर्फीले बांध या अस्थिर ढलान कमजोर पड़ने पर अचानक जलस्राव हो सकता है। इसी स्थिति को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF कहा जाता है। यह घटना बहुत कम समय में भारी तबाही ला सकती है, इसलिए संवेदनशील झीलों की लगातार निगरानी बेहद जरूरी मानी जाती है।
सेंसर और सैटेलाइट से होगी निगरानी
इस चेतावनी प्रणाली में ऐसे सेंसर लगाए जा रहे हैं जो जलस्तर, मौसम की स्थिति, बर्फ की मोटाई, उपसतही तापमान, भूमि की हलचल और पानी के प्रवाह को मापेंगे। चूंकि इस स्थान पर मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है, इसलिए डेटा का प्रसारण सैटेलाइट लिंक के जरिए किया जाएगा। यह व्यवस्था खास तौर पर उन ऊंचाई वाले इलाकों के लिए उपयोगी है, जहां पहुंचना कठिन होता है और संचार सुविधाएं सीमित रहती हैं।
इस अभियान की अवधि 29 सितंबर से 15 अक्टूबर 2026 तक तय की गई है। वैज्ञानिकों के साथ राज्य आपदा मोचन बल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के कर्मी भी इस फील्ड ऑपरेशन में शामिल हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने वैज्ञानिक दल को रवाना किया, जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संकेत दिया कि राज्य के अन्य संवेदनशील उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भी इसी तरह की निगरानी प्रणालियां लगाने की योजना है।
हिमालयी आपदा प्रबंधन में इसका महत्व
उत्तराखंड जैसे राज्य में हिमनदों और ग्लेशियल झीलों की निगरानी आपदा प्रबंधन का अहम हिस्सा बनती जा रही है। राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र ने 2023 में राज्य में 344 ग्लेशियल झीलों की पहचान की थी, जबकि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इनमें से 13 को उच्च जोखिम श्रेणी में रखा था। ऐसे में वसुधारा ताल पर शुरू हुई यह प्रणाली केवल एक तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि भविष्य में संभावित आपदाओं से पहले चेतावनी देने की दिशा में एक व्यावहारिक मॉडल भी है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- वसुधारा ताल उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है।
- GLOF का पूरा नाम ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड है, यानी हिमनदीय झील से अचानक पानी का बहाव।
- राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र ने 2023 में उत्तराखंड में 344 ग्लेशियल झीलों की पहचान की थी।
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इनमें से 13 झीलों को उच्च जोखिम वाला माना था।
हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु और भू-आकृतिक बदलावों के बीच ऐसी प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियां आपदा जोखिम घटाने का प्रभावी साधन बन सकती हैं। उत्तराखंड की यह पहल भविष्य में अन्य संवेदनशील स्थानों के लिए भी एक उपयोगी उदाहरण बन सकती है।