एनवीएस-03 से NavIC सेवा को फिर मजबूत करने की तैयारी

एनवीएस-03 से NavIC सेवा को फिर मजबूत करने की तैयारी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 30 अक्टूबर 2026 को एनवीएस-03 नौवहन उपग्रह प्रक्षेपित करने वाला है। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसे जीएसएलवी मार्क-II के जरिए भू-समकालिक कक्षा में भेजा जाएगा। यह भारत की क्षेत्रीय उपग्रह नौवहन प्रणाली NavIC की दूसरी पीढ़ी के पाँच उपग्रहों में तीसरा है।

NavIC की सेवाओं के लिए क्यों अहम है मिशन

NavIC का पूरा नाम ‘नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन’ है। यह भारत और देश की सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर आगे तक स्थिति, नौवहन और समय निर्धारण से जुड़ी सेवाएँ उपलब्ध कराता है। इसकी दो तरह की सेवाएँ हैं—नागरिक उपयोगकर्ताओं के लिए मानक स्थिति सेवा और अधिकृत उपयोगकर्ताओं के लिए प्रतिबंधित सेवा।

NavIC के मूल समूह की परिकल्पना सात उपग्रहों के साथ की गई थी। इनमें तीन भूस्थिर और चार भू-समकालिक कक्षाओं में रखे जाने थे। अक्टूबर 2026 तक इसके केवल तीन उपग्रह परिचालन में हैं, जिसके कारण स्वतंत्र स्थिति निर्धारण सेवा सक्रिय नहीं है। इस सेवा के लिए कम-से-कम चार परिचालन उपग्रह आवश्यक हैं। एनवीएस-03 का प्रक्षेपण इस न्यूनतम संख्या को बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उपग्रह की तकनीकी विशेषताएँ

एनवीएस-03 का प्रक्षेपण के समय भार लगभग 2,250 किलोग्राम होगा और यह करीब 3 किलोवाट बिजली उत्पन्न करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें रुबिडियम परमाणु घड़ियाँ लगी हैं, जिनमें स्वदेशी और आयातित इकाइयों का संयोजन शामिल है। सटीक समय निर्धारण उपग्रह नौवहन सेवाओं का महत्वपूर्ण आधार है।

यह उपग्रह एल1, एल5 और एस बैंड में नौवहन संकेत प्रसारित करेगा। एल1 और एल5 का उपयोग उपग्रह नौवहन प्रणालियों में होता है, जबकि एस बैंड भी NavIC की संकेत सेवाओं का हिस्सा है। दूसरी पीढ़ी के उपग्रहों का उद्देश्य प्रणाली की सेवाओं और परिचालन क्षमता को आगे बढ़ाना है।

प्रक्षेपण की तैयारी और रॉकेट

जीएसएलवी मार्क-II इसरो का तीन चरणों वाला प्रक्षेपण यान है। इसका उपयोग ऐसे अभियानों में किया जाता है जिनमें उपग्रहों को भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा में स्थापित करना हो। एनवीएस-03 अगस्त 2026 से श्रीहरिकोटा में है और इसके प्रक्षेपण अभियान की शुरुआत 14 सितंबर को हुई थी।

इसरो ने 4 सितंबर 2026 को जीएसएलवी मार्क-II से ईओएस-05 उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया था। केंद्रीय अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जुलाई 2026 में बताया था कि एनवीएस-04 और एनवीएस-05 का विकास उन्नत चरण में है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • NavIC भारत की क्षेत्रीय उपग्रह नौवहन प्रणाली है और इसका पूरा नाम ‘नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन’ है।
  • NavIC नागरिक उपयोगकर्ताओं को मानक स्थिति सेवा और अधिकृत उपयोगकर्ताओं को प्रतिबंधित सेवा देता है।
  • एनवीएस-03 दूसरी पीढ़ी के पाँच NavIC उपग्रहों में तीसरा उपग्रह है।
  • एनवीएस-03 को जीएसएलवी मार्क-II से सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया जाना है।

एनवीएस-03 का मिशन NavIC के परिचालन उपग्रहों की संख्या बढ़ाने और भारत की स्वतंत्र नौवहन क्षमता को मजबूत करने के प्रयास का हिस्सा है।

Originally written on October 22, 2026 and last modified on October 22, 2026.

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