सेंटॉरस एक्स-3 के अध्ययन से एक्स-रे पल्सर की बनावट पर नई रोशनी
बेंगलुरु स्थित रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने सेंटॉरस एक्स-3 में पदार्थ के प्रवाह और उसके आसपास की संरचना का अध्ययन किया है। किन्जल रॉय के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के अनुसार, यह एक्स-रे पल्सर पदार्थ को एक व्यवस्थित अभिवृद्धि डिस्क और उसके साथ घूमती अभिवृद्धि धारा के माध्यम से ग्रहण करता है। निष्कर्ष इस प्रणाली में पदार्थ के संचय और न्यूट्रॉन तारे के घूर्णन के बीच संबंध समझने में मदद करते हैं।
सेंटॉरस एक्स-3 की खासियत
सेंटॉरस एक्स-3 एक उच्च-द्रव्यमान वाली एक्स-रे द्वितारा प्रणाली है। इसमें अत्यधिक चुंबकीय न्यूट्रॉन तारा अपने साथी तारे से पदार्थ प्राप्त करता है। साथी तारे का द्रव्यमान सूर्य से दस गुने से अधिक है। यह प्रणाली पृथ्वी से लगभग 24,000 प्रकाश-वर्ष दूर, सेंटॉरस तारामंडल में स्थित है और चमकीले एक्स-रे पल्सरों में गिनी जाती है।
एक्स-रे द्वितारा में एक सघन पिंड—जैसे न्यूट्रॉन तारा या कृष्ण विवर—और एक साथी तारा होता है। जब साथी तारा विशाल हो, तो ऐसी प्रणाली को उच्च-द्रव्यमान वाली एक्स-रे द्वितारा कहा जाता है। सेंटॉरस एक्स-3 एक ग्रहणकारी द्वितारा भी है: पृथ्वी से देखने पर इसका साथी तारा समय-समय पर एक्स-रे स्रोत के सामने से गुजरता है। इसे 1971 में उहुरू एक्स-रे वेधशाला ने खोजा था और यह पहचाना गया पहला एक्स-रे पल्सर था।
अभिवृद्धि डिस्क और पल्स का महत्व
अभिवृद्धि वह प्रक्रिया है जिसमें कोई सघन खगोलीय पिंड आसपास के तारे या वातावरण से गैस और पदार्थ जुटाता है। घूमते हुए न्यूट्रॉन तारे का चुंबकीय क्षेत्र इस पदार्थ को उसके चुंबकीय ध्रुवों की ओर मोड़ सकता है। वहां से निकलने वाला एक्स-रे विकिरण तारे के घूमने के साथ नियमित अंतराल पर दिखाई देता है, जिसे पल्स के रूप में दर्ज किया जाता है।
शोध में डिस्क के साथ सह-घूर्णन करती पदार्थ-धारा का उल्लेख किया गया है। साथ ही, प्रणाली में स्थिर डिस्क-अभिवृद्धि के दौरान न्यूट्रॉन तारे की घूर्णन गति में दीर्घकालिक वृद्धि और कक्षा के धीरे-धीरे सिकुड़ने की जानकारी दी गई। पल्स-चरण-आधारित वर्णक्रमीय विश्लेषण में तारे के घूर्णन के अलग-अलग चरणों पर एक्स-रे वर्णक्रम की तुलना की जाती है। इससे विकिरण करने वाले क्षेत्र और पदार्थ की स्थिति में होने वाले बदलावों का अध्ययन संभव होता है।
अंतरिक्ष वेधशालाओं से मिले पूरक संकेत
सेंटॉरस एक्स-3 के बारे में हाल के अध्ययनों ने अलग-अलग पहलुओं पर प्रकाश डाला है। 2024 के एक अध्ययन में मैक्सी उपकरण के गैस स्लिट कैमरा के लगभग 14 वर्षों के आंकड़ों से एक्स-रे अवशोषण का विश्लेषण किया गया। इसमें कक्षा के दौरान फोटोवैद्युत अवशोषण में असममित बदलाव पाया गया। मैक्सी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर स्थापित एक्स-रे उपकरण है।
मार्च 2026 के अध्ययन में एक्सआरआईएसएम के आंकड़ों से प्रणाली में प्रतिदीप्ति करने वाले पदार्थ की जांच की गई। इसमें कम आयनीकरण से जुड़ी लौह-के प्रतिदीप्ति रेखाओं में ऊर्जा-स्थानांतरण दर्ज किया गया। एक्सआरआईएसएम एक्स-रे खगोल विज्ञान मिशन है, जिसे 2023 में प्रक्षेपित किया गया था।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सेंटॉरस एक्स-3 की खोज 1971 में उहुरू एक्स-रे वेधशाला ने की थी।
- एक्स-रे पल्सर ऐसा घूमता हुआ न्यूट्रॉन तारा है, जो स्पंदित एक्स-रे विकिरण उत्सर्जित करता है।
- मैक्सी का गैस स्लिट कैमरा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के जापानी प्रयोग मॉड्यूल पर स्थित है।
- एक्सआरआईएसएम मिशन सितंबर 2023 में प्रक्षेपित किया गया था।
सेंटॉरस एक्स-3 का अध्ययन दिखाता है कि एक्स-रे पल्सर में पदार्थ का प्रवाह केवल तारे तक पहुंचने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि डिस्क, धारा और कक्षीय गति से जुड़ी जटिल गतिशीलता भी है।