एनएचएआई के नए मानक: हाई-स्पीड राष्ट्रीय राजमार्गों में आएगी एकरूपता
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने 21 सितंबर 2026 को एक्सप्रेसवे को छोड़कर एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड राष्ट्रीय राजमार्गों की योजना और डिजाइन के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन मानकों का उद्देश्य आगामी ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड कॉरिडोरों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, तकनीकी मानकों, सड़क सुरक्षा और परिचालन दक्षता में एकरूपता लाना है।
किस तरह के कॉरिडोर होंगे दायरे में
ये दिशा-निर्देश उन राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू होंगे जो एक्सेस-कंट्रोल्ड हैं, लेकिन एक्सप्रेसवे की श्रेणी में नहीं आते। इसमें नए मार्गों पर बनने वाले ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट और मौजूदा मार्गों के उन्नयन वाले ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट दोनों शामिल हैं। एनएचएआई का फोकस ऐसे कॉरिडोरों पर है जो तेज यातायात, बेहतर कनेक्टिविटी और सुरक्षित संचालन के लिए बनाए जा रहे हैं।
अब तक ऐसे हाई-स्पीड कॉरिडोरों के लिए अलग मानक नहीं थे, जिससे अलग-अलग परियोजनाओं की डीपीआर तैयार करने में भिन्नता दिखती थी। नए ढांचे से योजना, डिजाइन और क्रियान्वयन में समानता आने की उम्मीद है।
यातायात के हिसाब से तय होगा लेन और चौड़ाई
नए मानकों में ट्रैफिक वॉल्यूम के आधार पर लेन कॉन्फ़िगरेशन तय किया गया है। जिन कॉरिडोरों पर 15,000 वाहन तक का यातायात होगा, वहां 4-लेन हाईवे, 4-लेन संरचनाएं और 60 मीटर चौड़ाई रखी जाएगी। 15,000 से 25,000 वाहनों वाले कॉरिडोरों में 4-लेन हाईवे के साथ 6-लेन संरचनाएं और 70 मीटर चौड़ाई होगी।
इसी तरह 25,000 से 40,000 वाहनों वाले मार्गों के लिए 6-लेन हाईवे, 6-लेन संरचनाएं और 70 मीटर चौड़ाई निर्धारित की गई है। यह व्यवस्था भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, ताकि कॉरिडोर लंबे समय तक उपयोगी बने रहें।
सुरक्षा, पहुंच नियंत्रण और विकास की दिशा
दिशा-निर्देशों में सड़क सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। हाई-स्पीड कॉरिडोरों पर प्रवेश और निकास बिंदुओं की पहले से सूचना देना अनिवार्य होगा, ताकि चालक समय रहते निर्णय ले सकें। कॉरिडोर के बाहरी किनारे पर 1 मीटर ऊंची बाउंड्री वॉल बनाई जाएगी, जिससे अनधिकृत प्रवेश और आवारा पशुओं की आवाजाही रोकी जा सके।
इसके अलावा, एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और प्रमुख आर्टेरियल सड़कों के क्रॉसिंग पर रैंप सहित इंटरचेंज अनिवार्य होंगे। इससे ट्रैफिक का प्रवाह बेहतर होगा और दुर्घटनाओं की आशंका कम की जा सकेगी।
ये दिशा-निर्देश विकसित भारत 2047 की व्यापक योजना से भी जुड़े हैं, जिसमें 50,000 किलोमीटर एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, बंदरगाहों, हवाई अड्डों, औद्योगिक क्षेत्रों और अन्य बड़े यातायात-उत्पादक केंद्रों को जोड़ने वाले मार्गों को भी इस ढांचे में महत्व दिया गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एनएचएआई की स्थापना 1988 में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अधिनियम, 1988 के तहत की गई थी।
- एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे में प्रवेश और निकास केवल निर्धारित बिंदुओं से ही होता है।
- ग्रीनफील्ड परियोजनाएं नए मार्गों पर बनाई जाती हैं, जबकि ब्राउनफील्ड परियोजनाओं में मौजूदा कॉरिडोर का उन्नयन किया जाता है।
- विकसित भारत 2047 के तहत 50,000 किलोमीटर एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर का लक्ष्य रखा गया है।
इन नए मानकों से राष्ट्रीय राजमार्गों की योजना अधिक व्यवस्थित होगी और देश में तेज, सुरक्षित तथा समान गुणवत्ता वाले सड़क नेटवर्क के विकास को गति मिलेगी।