आसियान के साथ आतंकवाद-रोधी सहयोग बढ़ाएगा भारत
भारत ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के सदस्य देशों और उनके संवाद साझेदारों के साथ आतंकवाद-रोधी अनुभव साझा करने की पेशकश की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के सेबू में आयोजित 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस में यह प्रस्ताव रखा। बैठक 28 और 29 अक्टूबर को हुई।
संयुक्त अभ्यास और क्षमता निर्माण पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत संयुक्त सैन्य अभ्यास, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों और खुफिया जानकारी साझा करने के माध्यम से क्षेत्रीय साझेदारों के साथ सहयोग कर सकता है। उन्होंने सीमा-पार सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के भारत के अनुभव का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, मई 2025 में किया गया ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद-रोधी नीति का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस अभियान में आतंकवादी ढांचे को नष्ट किया गया और यह राज्य-प्रायोजित आतंकवाद के प्रति भारत की स्थिति को दर्शाता है।
आतंकवाद-रोधी सहयोग के लिए भारत और मलेशिया 2024–2027 की अवधि में विशेषज्ञ कार्यसमूह की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं। यह समूह सदस्य देशों के बीच अनुभव और व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने का मंच है। भारत की पेशकश इसी मौजूदा व्यवस्था को आगे मजबूत करने की दिशा में देखी जा सकती है।
हिंद-प्रशांत और समुद्री सुरक्षा का मुद्दा
बैठक में रक्षा मंत्री ने सुरक्षित और लचीले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की भारत की सोच रखी। उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र और व्यापक हिंद-प्रशांत में भारत की भूमिका को भरोसेमंद सुरक्षा प्रदाता के रूप में रेखांकित किया। सिंह ने समुद्र में नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता तथा संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय के पालन पर जोर दिया।
उन्होंने अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ के साथ बातचीत में पाकिस्तान के लिए अमेरिकी एफ-16 पैकेज और सीमा-पार आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताएं भी उठाईं। हेगसेथ ने सीमा-पार आतंकवाद से मुकाबले में अमेरिका के समर्थन की पुष्टि की।
आसियान रक्षा संवाद का व्यापक महत्व
आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस एक बहुपक्षीय रक्षा सहयोग मंच है। इसमें आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ आठ संवाद साझेदार—ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, रूस और अमेरिका—शामिल होते हैं। इसका पहला आयोजन 2010 में हुआ था। यह मंच आतंकवाद-रोधी सहयोग के साथ समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा का अवसर देता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आसियान की स्थापना 1967 में बैंकॉक घोषणा के माध्यम से हुई थी।
- आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस का पहला आयोजन 2010 में हुआ था।
- भारत और मलेशिया 2024–2027 के लिए आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्यसमूह की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं।
- संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय 1982 में अपनाया गया और 1994 में लागू हुआ।
भारत की यह पहल आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा जैसे साझा क्षेत्रीय मुद्दों पर रक्षा सहयोग को व्यावहारिक रूप देने का प्रयास है।