आयुष वर्मा ने एफ53 गोला फेंक में भारत को दिलाया स्वर्ण
भारत के आयुष वर्मा ने 21 अक्टूबर 2026 को जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में पुरुष एफ53 गोला फेंक स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास 8.16 मीटर का रहा। इस जीत के साथ वर्मा ने इन खेलों में अपना दूसरा पदक हासिल किया।
8.16 मीटर के प्रयास से स्वर्ण
एफ53 गोला फेंक के फाइनल में ईरान के अलीरेज़ा हेमामी ने 8.09 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता, जबकि कजाखस्तान के माखम्बेत सेरिक्कलियेव 6.81 मीटर के प्रयास के साथ तीसरे स्थान पर रहे। वर्मा ने इससे पहले 20 अक्टूबर को पुरुष भाला फेंक एफ53/54 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था।
15 जुलाई 1991 को जन्मे वर्मा ने 2020 में प्रतिस्पर्धी पैरा एथलेटिक्स की शुरुआत की। वह एफ53 गोला फेंक में विशेषज्ञ हैं और कोच रॉबिन कुमार के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेते हैं।
एफ53 वर्ग में बैठकर होती है थ्रोइंग स्पर्धा
पैरा एथलेटिक्स में खिलाड़ियों का वर्गीकरण इस आधार पर किया जाता है कि उनकी दिव्यांगता किसी विशेष खेल में प्रदर्शन को किस तरह प्रभावित करती है। एफ53 वर्ग में खिलाड़ी बैठकर थ्रो करते हैं और फेंकने के लिए विशेष फ्रेम का इस्तेमाल करते हैं। इस वर्ग में ऊपरी शरीर की ताकत के साथ समन्वय और तकनीक भी अहम होते हैं।
एथलेटिक्स वर्गीकरण में ‘एफ’ मैदान पर होने वाली स्पर्धाओं, जैसे गोला फेंक और भाला फेंक, के लिए इस्तेमाल होता है, जबकि ‘टी’ ट्रैक स्पर्धाओं को दर्शाता है। पैरा खेलों में वर्गीकरण खेल-विशेष होता है; एक खेल में खिलाड़ी का वर्ग दूसरे खेल में अपने-आप तय नहीं होता।
एशियाई पैरा खेल और भारत का प्रदर्शन
एशियाई पैरा खेल एशिया के दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए आयोजित बहु-खेल प्रतियोगिता है। इसका पहला आयोजन 2010 में चीन के ग्वांगझू में हुआ था। एशियाई पैरालंपिक समिति इस प्रतियोगिता का आयोजन करती है और यह सामान्यतः हर चार वर्ष में आयोजित होती है। 2026 के खेल 18 से 24 अक्टूबर तक आइची-नागोया, जापान में हो रहे हैं। 21 अक्टूबर तक भारत ने कुल 38 पदक जीते थे, जिनमें 10 स्वर्ण पदक शामिल थे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पहले एशियाई पैरा खेल 2010 में चीन के ग्वांगझू में आयोजित हुए थे।
- पैरा एथलेटिक्स में ‘एफ’ मैदान की और ‘टी’ ट्रैक की स्पर्धाओं को दर्शाता है।
- एफ53 वर्ग में खिलाड़ी बैठकर थ्रोइंग स्पर्धाओं में भाग लेते हैं।
- आयुष वर्मा का स्वर्ण पदक जीतने वाला थ्रो 8.16 मीटर का था।
वर्मा की जीत भारत के पैरा एथलेटिक्स दल के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनका प्रदर्शन यह भी दिखाता है कि तकनीक और वर्ग-विशेष की तैयारी मैदान पर निर्णायक भूमिका निभाती है।