आगरा में आयोजित हुआ पहला ब्रिक्स एमएसएमई फोरम 2026
भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स (BRICS) सहयोग को नई दिशा देते हुए 19-20 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के आगरा में प्रथम ब्रिक्स एमएसएमई फोरम 2026 का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) द्वारा आयोजित किया गया। फोरम में ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। इस आयोजन का उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्यमों के विकास, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना था।
ब्रिक्स और एमएसएमई सहयोग का महत्व
ब्रिक्स विश्व की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतर-सरकारी समूह है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। एमएसएमई अर्थात सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं क्योंकि वे रोजगार सृजन, नवाचार और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ब्रिक्स एमएसएमई फोरम का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान करना और वित्त, तकनीक, उद्यमिता विकास, स्थिरता तथा वैश्विक बाजारों तक पहुंच जैसे विषयों पर सहयोग को मजबूत बनाना है।
फोरम के प्रमुख विषय
केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी ने फोरम के दौरान कहा कि वित्तीय संसाधनों तक पहुंच, नई तकनीकों को अपनाना, सतत विकास और बाजार उपलब्धता जैसी चुनौतियां सभी ब्रिक्स देशों के एमएसएमई क्षेत्र के सामने समान रूप से मौजूद हैं। एमएसएमई मंत्रालय के सचिव भारत खेड़ा ने भी तकनीकी नवाचार, डिजिटल परिवर्तन, कौशल विकास, सतत विनिर्माण और वैश्विक बाजारों तक पहुंच को सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया। इन विषयों पर सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने अनुभव और सफल मॉडल साझा किए।
ब्रिक्स एमएसएमई सहयोग ढांचा
ब्रिक्स एमएसएमई सहयोग ढांचे को वर्ष 2023 में दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता के दौरान अपनाया गया था। इस ढांचे का उद्देश्य महिला-स्वामित्व वाले उद्यमों, युवा उद्यमियों, संसाधनों तक पहुंच और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एमएसएमई की भागीदारी को बढ़ावा देना है। यह ढांचा सदस्य देशों को ऐसी नीतियां विकसित करने के लिए प्रेरित करता है जो छोटे व्यवसायों को अधिक प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बना सकें।
भारत की अध्यक्षता और एमएसएमई एजेंडा
भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता में एमएसएमई सहयोग को विशेष महत्व दिया गया है। 24 अप्रैल 2026 को एसएमई कार्य समूह की पहली वर्चुअल बैठक आयोजित की गई थी, जबकि 26 मई 2026 को दूसरी बैठक “एमएसएमई के लिए तकनीक तक पहुंच बढ़ाने” विषय पर आयोजित हुई। फोरम के दौरान ब्रिक्स एमएसएमई प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया गया, जहां विभिन्न देशों के उद्यमों और नवाचारों को प्रदर्शित किया गया। उत्तर प्रदेश के एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने राज्य की नीतियों में बुनियादी ढांचे, कौशल विकास, डिजिटल सशक्तिकरण और नीति समर्थन के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
एमएसएमई और वैश्विक आर्थिक विकास
एमएसएमई क्षेत्र आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और स्थानीय उद्योगों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में एमएसएमई का वर्गीकरण सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 के अंतर्गत किया जाता है। वर्तमान समय में डिजिटल तकनीक, फिनटेक आधारित ऋण प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय व्यापार अवसरों के विस्तार के साथ एमएसएमई क्षेत्र वैश्विक अर्थव्यवस्था में और अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ब्रिक्स समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।
- ब्रिक्स एमएसएमई सहयोग ढांचा वर्ष 2023 में दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता के दौरान अपनाया गया था।
- भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता में एमएसएमई सहयोग को प्रमुख एजेंडा बनाया गया है।
- भारत में एमएसएमई का वर्गीकरण एमएसएमई विकास अधिनियम, 2006 के तहत किया जाता है।
आगरा में आयोजित पहला ब्रिक्स एमएसएमई फोरम 2026 छोटे और मध्यम उद्यमों के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह मंच सदस्य देशों को तकनीकी नवाचार, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और बाजार विस्तार जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है, जिससे वैश्विक स्तर पर एमएसएमई क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता और विकास को नई गति मिल सकती है।