आईपीओ में निर्गम आकार बदलने की छूट मार्च 2027 तक
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) में नए शेयर जारी करके जुटाई जाने वाली राशि के आकार में बदलाव की अस्थायी छूट 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दी है। यह सुविधा उन आईपीओ पर लागू होगी जो इस तारीख तक खुलेंगे। निर्धारित शर्तें पूरी करने पर कंपनियां नए मसौदा निर्गम दस्तावेज दाखिल किए बिना नए निर्गम का आकार 50 प्रतिशत तक घटा या बढ़ा सकेंगी।
कंपनियों को क्या राहत मिलेगी
इस छूट के तहत निर्गम का आकार बदलने पर कंपनी को नया मसौदा दस्तावेज दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, उसे निर्गम के मुख्य उद्देश्यों को बरकरार रखना होगा और नियामकीय अनुपालन की निर्धारित शर्तें पूरी करनी होंगी। यानी यह सुविधा निर्गम के आकार में सीमित बदलाव के लिए है; इससे कंपनी के खुलासे और अन्य अनुपालन दायित्व समाप्त नहीं होते।
पहले यह राहत उन कंपनियों के लिए थी जिनके मसौदा रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) 30 सितंबर 2026 तक दाखिल हुए थे। सेबी के 12 अक्टूबर 2026 के फैसले से पात्रता की अवधि आगे बढ़ी है और अब 31 मार्च 2027 तक खुलने वाले आईपीओ इसके दायरे में आ सकते हैं।
आईपीओ दस्तावेज और निर्गम के प्रकार
आईपीओ के जरिए कंपनी निवेशकों को प्रतिभूतियां सार्वजनिक रूप से जारी करके पूंजी जुटाती है। इसमें नया निर्गम, मौजूदा शेयरधारकों की ओर से बिक्री प्रस्ताव, या दोनों शामिल हो सकते हैं। नए निर्गम में कंपनी नए शेयर जारी करती है और उससे प्राप्त धन कंपनी को मिलता है। बिक्री प्रस्ताव में मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचते हैं, इसलिए बिक्री से मिली राशि उन्हें प्राप्त होती है।
डीआरएचपी में कंपनी, उसके कारोबार, वित्तीय स्थिति, जोखिमों और प्रस्तावित निर्गम से जुड़ी जानकारी दी जाती है। सार्वजनिक निर्गम की प्रक्रिया में सेबी-पंजीकृत मर्चेंट बैंकर कंपनियों की मदद करते हैं और जरूरी खुलासों तथा प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करने में भूमिका निभाते हैं।
आईपीओ बाजार में गतिविधि
जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही में मुख्य बोर्ड के 69 आईपीओ से 90,482 करोड़ रुपये जुटाए गए। इसी अवधि में लघु एवं मध्यम उद्यमों के 92 सार्वजनिक निर्गमों ने 4,167 करोड़ रुपये जुटाए। दोनों श्रेणियों को मिलाकर कुल राशि 94,649 करोड़ रुपये रही। निवेश बैंकिंग क्षेत्र के संगठन एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर ऑफ इंडिया ने परिचालन संबंधी चुनौतियों पर प्रतिनिधित्व किया था और इस अवधि-विस्तार का स्वागत किया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
:
- सेबी की स्थापना भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के तहत हुई थी।
- नए निर्गम से जारी नए शेयरों की राशि कंपनी को मिलती है।
- बिक्री प्रस्ताव में मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचते हैं और राशि उन्हें प्राप्त होती है।
- सेबी की छूट के तहत नए निर्गम का आकार 50 प्रतिशत तक बदल सकता है, बशर्ते मुख्य उद्देश्य बरकरार रहें और अनुपालन शर्तें पूरी हों।
यह विस्तार कंपनियों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप निर्गम का आकार तय करने में अधिक लचीलापन देता है, जबकि मुख्य उद्देश्य और नियामकीय अनुपालन की शर्तें लागू रहती हैं।