आईएनएस सृष्टि के जलावतरण से नौसेना की समुद्री निगरानी को मजबूती
गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने 27 अक्टूबर 2026 को गोवा के वाडेम परिसर में भारतीय नौसेना के पोत आईएनएस सृष्टि का जलावतरण किया। यह अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोतों की श्रृंखला में चौथा पोत है, जिसे गोवा शिपयार्ड बना रहा है। समारोह में संदीपा सहाय ने पारंपरिक जलावतरण प्रक्रिया पूरी की और रक्षा वित्त सचिव विश्वजीत सहाय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस पोत की आधारशिला 9 जून 2025 को रखी गई थी।
समुद्री सुरक्षा और आपदा सहायता में भूमिका
अपतटीय गश्ती पोत समुद्र में निगरानी और सुरक्षा संबंधी कामों के लिए उपयोग किए जाते हैं। ये तटीय क्षेत्रों के साथ-साथ खुले समुद्र में भी गश्त कर सकते हैं। आईएनएस सृष्टि सहित इस श्रृंखला के पोतों को समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव, समुद्र में स्थित संपत्तियों की सुरक्षा और समुद्री डकैती-रोधी अभियानों के लिए तैयार किया जा रहा है।
इन पोतों की भूमिका केवल नियमित गश्त तक सीमित नहीं है। आपदा या आपात स्थिति के दौरान ये मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में भी योगदान दे सकते हैं। अलग-अलग प्रकार के समुद्री अभियानों के लिए इनकी बहुउद्देशीय उपयोगिता नौसेना की अपतटीय निगरानी और सुरक्षा क्षमता बढ़ाने में सहायक होगी।
स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने वाली परियोजना
भारतीय नौसेना के लिए 11 अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोतों का अनुबंध 30 मार्च 2023 को किया गया था। इसकी कुल लागत 9,781 करोड़ रुपये है। खरीद ‘बाय (इंडियन-आईडीडीएम)’ श्रेणी के अंतर्गत हुई है। आईडीडीएम का आशय स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित उपकरणों से है। यह व्यवस्था भारत में रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहित करती है और आत्मनिर्भर भारत तथा मेक इन इंडिया पहलों के अनुरूप है।
पूरे बेड़े का निर्माण दो भारतीय शिपयार्ड में एक साथ किया जा रहा है। गोवा शिपयार्ड लिमिटेड सात पोत बना रहा है, जबकि कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स चार पोतों का निर्माण कर रहा है। आईएनएस सृष्टि गोवा शिपयार्ड द्वारा इस कार्यक्रम के तहत जलावतरण किया गया चौथा पोत है। ‘सृष्टि’ संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ सृजन या रचना है। ‘यार्ड 1283’ शिपयार्ड में पोत की निर्माण-पहचान संख्या है।
जहाज निर्माण में दो शिपयार्ड की भागीदारी
दो अलग-अलग शिपयार्ड में निर्माण से नौसेना के लिए निर्धारित 11 पोतों की परियोजना में देश के भीतर जहाज निर्माण क्षमता का उपयोग हो रहा है। गोवा और कोलकाता में चल रहा यह काम स्वदेशी रक्षा विनिर्माण के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा के लिए आवश्यक पोतों की उपलब्धता बढ़ाने से जुड़ा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत कार्यक्रम में कुल 11 पोत शामिल हैं।
- गोवा शिपयार्ड लिमिटेड सात और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स चार पोत बना रहे हैं।
- आईएनएस सृष्टि यार्ड 1283 है और गोवा शिपयार्ड से जलावतरण किया गया चौथा पोत है।
- एचएडीआर का अर्थ मानवीय सहायता और आपदा राहत है।
आईएनएस सृष्टि का जलावतरण नौसेना की अपतटीय निगरानी और बहुउद्देशीय समुद्री अभियानों के लिए नई क्षमता जोड़ने की दिशा में अहम कदम है।