आईएनएस विक्रांत पर राफेल मरीन की पहली लैंडिंग से नौसैनिक क्षमता को बल

आईएनएस विक्रांत पर राफेल मरीन की पहली लैंडिंग से नौसैनिक क्षमता को बल

भारतीय नौसेना के स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर राफेल मरीन लड़ाकू विमान ने 29 अक्टूबर 2026 को पहली बार उतरकर उड़ान परीक्षणों में अहम उपलब्धि दर्ज की। इसी दिन विमान ने पोत से पहली उड़ान भी भरी। इन परीक्षणों से भारत के विमानवाहक पोतों पर नौसैनिक लड़ाकू विमान के संचालन की तैयारी को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

विक्रांत पर परीक्षण का महत्व

राफेल मरीन की लैंडिंग और उड़ान आईएनएस विक्रांत के साथ विमान की अनुकूलता जांचने के लिए किए जा रहे परीक्षणों का हिस्सा हैं। भारतीय नौसेना ने 30 अक्टूबर को अपने आधिकारिक एक्स खाते पर लैंडिंग का वीडियो साझा किया। पोत पर सफल संचालन के लिए विमान को सीमित डेक पर उतरने, रुकने और फिर उड़ान भरने की आवश्यकताओं के अनुरूप होना पड़ता है।

इन परीक्षणों का उद्देश्य राफेल मरीन को भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत संचालन में शामिल करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। पोत पर परीक्षण से पहले गोवा में तट-आधारित परीक्षण भी किए गए थे। इस चरण में विमान और पोत की प्रणालियों के बीच तालमेल तथा विमान के उतरने और उड़ान भरने की प्रक्रिया का आकलन किया जाता है।

एसटीओबीएआर प्रणाली के अनुरूपता की जांच

आईएनएस विक्रांत में एसटीओबीएआर प्रणाली का उपयोग होता है। इस व्यवस्था में विमान अपनी शक्ति से आगे बढ़ते हुए पोत के ढलानदार अग्रभाग यानी स्की-जंप से उड़ान भरता है। उतरते समय विमान के अरेस्टर हुक को डेक पर लगी तारों से रोका जाता है। यह व्यवस्था कैटापल्ट की सहायता से विमान को प्रक्षेपित करने वाली प्रणाली से अलग है। राफेल मरीन के परीक्षण यह परखने के लिए भी महत्वपूर्ण हैं कि विमान इस प्रणाली के तहत सुरक्षित और प्रभावी ढंग से काम कर सकता है या नहीं।

भारत-फ्रांस समझौते और विमान की विशेषताएं

भारत और फ्रांस के समझौते में नौसेना के लिए कुल 26 विमान शामिल हैं—22 एकल-सीट लड़ाकू विमान और चार दो-सीट प्रशिक्षण विमान। आपूर्ति 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है और 2030 या 2031 तक पूरी हो सकती है। अनुबंध के मूल्य को लेकर प्रकाशित आंकड़ों में अंतर है: एक आंकड़ा लगभग 63,000 करोड़ रुपये बताता है, जबकि दूसरा 36 अरब अमेरिकी डॉलर का उल्लेख करता है। ये दोनों राशियां एक-दूसरे के बराबर नहीं हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एसटीओबीएआर का पूरा नाम शॉर्ट टेक-ऑफ बट अरेस्टेड रिकवरी है; इसमें स्की-जंप और डेक पर लगी रोकने वाली तारें इस्तेमाल होती हैं।
  • गोवा के आईएनएस हंसा में स्थित तट-आधारित परीक्षण सुविधा विमानवाहक पोत के स्की-जंप और लैंडिंग डेक जैसी व्यवस्था उपलब्ध कराती है।
  • राफेल मरीन में मजबूत लैंडिंग गियर, अरेस्टर हुक और विमान को प्रक्षेपित करने में मदद करने वाली नोज-गियर लॉन्च बार जैसी नौसैनिक विशेषताएं हैं।
  • राफेल मरीन, फ्रांस में विकसित राफेल लड़ाकू विमान का नौसैनिक संस्करण है।

आईएनएस विक्रांत पर पहली लैंडिंग इस विमान को भारतीय नौसेना के संचालन में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण परीक्षण चरण है।

Originally written on October 31, 2026 and last modified on October 31, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *