आईएएफ में रखरखाव कमान की जिम्मेदारी अब एयर मार्शल केएए संजीब के पास
भारतीय वायुसेना में एयर मार्शल केएए संजीब, एवीएसएम, वीएसएम ने 1 सितंबर 2026 को एयर ऑफिसर-इन-चार्ज मेंटेनेंस (AOM) का पदभार संभाल लिया। यह जिम्मेदारी ऐसे समय आई है जब एयर मार्शल संजीव घुरतिया 31 अगस्त 2026 को 39 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए। वायुसेना के संचालन में यह पद बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि इसके तहत विमान रखरखाव, इंजीनियरिंग सहायता, सिस्टम प्रबंधन और ऑपरेशनल एसेट्स की मेंटेनेंस योजना जैसी जिम्मेदारियां आती हैं।
वायुसेना की तकनीकी रीढ़ माने जाने वाला पद
एयर ऑफिसर-इन-चार्ज मेंटेनेंस वायुसेना मुख्यालय में एक वरिष्ठ नियुक्ति है। यह पद केवल तकनीकी देखरेख तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि विमान, उपकरण और संबंधित प्रणालियां मिशन के लिए तैयार रहें। आधुनिक वायुसेना में रखरखाव और सिस्टम सपोर्ट उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने उड़ान संचालन, क्योंकि किसी भी अभियान की सफलता काफी हद तक तकनीकी तत्परता पर निर्भर करती है।
भारतीय वायुसेना जैसे बड़े और विविध बेड़े वाली सेवा में यह जिम्मेदारी रणनीतिक महत्व रखती है। विमानन तकनीक, स्पेयर सप्लाई, सिस्टम अपग्रेड और मेंटेनेंस प्लानिंग के बीच समन्वय बनाए रखना इस पद का मुख्य दायित्व होता है।
एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग से लेकर शीर्ष जिम्मेदारी तक
एयर मार्शल केएए संजीब को 3 सितंबर 1988 को भारतीय वायुसेना की एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग (मैकेनिकल ब्रांच) में कमीशन मिला था। उनके करियर में डायरेक्टर जनरल (एयरक्राफ्ट), डायरेक्टर जनरल (सिस्टम) और एयर मुख्यालय में असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (मेंटेनेंस प्लान्स) जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल रहे हैं।
वर्ष 2003 में उन्होंने एयर मुख्यालय प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम के लीड इंजीनियर और टीम लीडर के रूप में भारतीय वायुसेना के पहले IL-78 फ्लाइट रिफ्यूलर विमान के शामिल किए जाने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई थी। यह उपलब्धि वायुसेना की लंबी दूरी की संचालन क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सम्मान, विरासत और राष्ट्रीय स्मृति से जुड़ाव
एयर मार्शल संजीब को 2015 में विशिष्ट सेवा पदक (VSM) और 2026 में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) से सम्मानित किया गया। ये दोनों सम्मान भारतीय सशस्त्र बलों में विशिष्ट और उत्कृष्ट सेवा के लिए दिए जाते हैं।
पदभार संभालने के बाद उन्होंने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जाकर पुष्पचक्र अर्पित किया। यह स्मारक देश के उन सैनिकों की स्मृति में समर्पित है, जिन्होंने कर्तव्य पालन के दौरान अपने प्राण न्योछावर किए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी।
- एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग शाखा विमान और सिस्टम के रखरखाव से जुड़ी होती है।
- IL-78 एक फ्लाइट रिफ्यूलर विमान है, जिसका उपयोग हवा में ईंधन भरने के लिए किया जाता है।
- विशिष्ट सेवा पदक और अति विशिष्ट सेवा पदक भारतीय सैन्य सेवा के प्रतिष्ठित सम्मान हैं।
एयर मार्शल केएए संजीब की नियुक्ति वायुसेना की तकनीकी और रखरखाव व्यवस्था में निरंतरता का संकेत देती है। ऐसे पदों पर अनुभवी अधिकारियों की भूमिका बल की परिचालन तत्परता बनाए रखने में निर्णायक होती है।