आईआईटी मद्रास की नई पहल से जैव-विनिर्माण में कौशल प्रशिक्षण

आईआईटी मद्रास की नई पहल से जैव-विनिर्माण में कौशल प्रशिक्षण

आईआईटी मद्रास ने जैव प्रौद्योगिकी और जैव-विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार के लिए स्नातकों को तैयार करने के उद्देश्य से ‘उद्योग’ (UDYOG) कार्यक्रम शुरू किया है। इसका पहला बैच 18 जनवरी 2027 से आरंभ होगा। यह प्रशिक्षण कक्षा की पढ़ाई के साथ प्रयोगशाला और उद्योग से जुड़ा व्यावहारिक अनुभव भी देगा।

ऑनलाइन पढ़ाई से प्रयोगशाला प्रशिक्षण तक

‘उद्योग’ का पूरा नाम ‘यंग ग्रेजुएट्स के लिए कौशल उन्नयन और विकास’ है। इस कार्यक्रम को आईआईटी मद्रास के सेंटर फॉर आउटरीच एंड डिजिटल एजुकेशन के माध्यम से संचालित किया जाएगा। प्रशिक्षण तीन चरणों में होगा। पहले चरण में प्रतिभागी तीन महीने तक ऑनलाइन पढ़ाई करेंगे। इसके बाद आईआईटी मद्रास बायोफाउंड्री में चार सप्ताह का गहन प्रयोगशाला प्रशिक्षण होगा। इसमें पायलट-स्तर पर प्रक्रियाओं को समझने का अवसर भी शामिल है। प्रशिक्षण के बाद उद्योग में इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

पायलट-स्तर का अनुभव प्रयोगशाला में विकसित प्रक्रियाओं को बड़े पैमाने पर अपनाने की तैयारी समझने में मदद करता है। इस तरह कार्यक्रम का जोर केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर नहीं, बल्कि जैव-आधारित उत्पादों के विकास और निर्माण में काम आने वाले कौशल पर है।

कौन कर सकता है आवेदन

यह कार्यक्रम देशभर के कॉलेजों और संस्थानों में जैव प्रौद्योगिकी तथा उससे जुड़े विषयों में पढ़ रहे पूर्व-अंतिम और अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए खुला है। पात्र विद्यार्थी बीटेक, एमटेक और एमएससी पाठ्यक्रमों से होने चाहिए। शुरुआती पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 दिसंबर 2026 है।

कार्यक्रम का उद्घाटन आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामाकोटी ने किया। जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोफेसर गुहान जयरामन इसके मुख्य समन्वयक हैं। यह पहल आईआईटीएम-बायोफाउंड्री फिनिशिंग स्कूल का हिस्सा है और सिनबायोएमई के माध्यम से शुरू की गई है। सिनबायोएमई, आईआईटी मद्रास और टीआईसीईएल की बायोफाउंड्री है, जिसका काम जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान, नवाचार, जैव-विनिर्माण और कौशल विकास से जुड़ा है।

जैव-विनिर्माण में व्यावहारिक कौशल का महत्व

जैव प्रौद्योगिकी में जीवों, जैविक प्रणालियों या उनके घटकों का उपयोग करके उत्पाद और प्रक्रियाएँ विकसित की जाती हैं। जैव-विनिर्माण में कोशिकाओं, एंजाइमों या अन्य जैविक प्रणालियों की मदद से दवाएँ, टीके, औद्योगिक एंजाइम और जैव-आधारित सामग्री बनाई जा सकती है। इन क्षेत्रों में आणविक जीवविज्ञान, आनुवंशिकी, सूक्ष्मजीवविज्ञान और जैव-रासायनिक अभियांत्रिकी जैसे विषयों का योगदान रहता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • UDYOG का पूरा नाम ‘Upskilling and Development for Young Graduates’ है।
  • ऑनलाइन प्रशिक्षण आईआईटी मद्रास के सेंटर फॉर आउटरीच एंड डिजिटल एजुकेशन के माध्यम से होगा।
  • व्यावहारिक प्रशिक्षण आईआईटी मद्रास बायोफाउंड्री में दिया जाएगा।
  • कार्यक्रम का पहला बैच 18 जनवरी 2027 से शुरू होने वाला है।

‘उद्योग’ का उद्देश्य अकादमिक शिक्षा और जैव-प्रौद्योगिकी उद्योग की व्यावहारिक जरूरतों के बीच की दूरी कम करना है। प्रयोगशाला अभ्यास, पायलट-स्तर का अनुभव और इंटर्नशिप इस प्रशिक्षण को रोजगारोन्मुख बनाते हैं।

Originally written on October 22, 2026 and last modified on October 22, 2026.

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