आईआईटी-बीएचयू में सी-डॉट का छठा उत्कृष्टता केंद्र
दूरसंचार प्रौद्योगिकी में स्वदेशी अनुसंधान और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) ने वाराणसी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) में अपना छठा उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया है। 23 अक्टूबर 2026 को सी-डॉट और आईआईटी (बीएचयू) के बीच सहयोग, तकनीक विकास और विशेष प्रशिक्षण के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
शिक्षा और तकनीक के बीच सहयोग
नए केंद्र का उद्घाटन सी-डॉट के कार्यकारी उपाध्यक्ष पंकज कुमार दलेला और आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रोफेसर अमित पात्रा की उपस्थिति में हुआ। इसका उद्देश्य अकादमिक अनुसंधान को दूरसंचार क्षेत्र की व्यावहारिक जरूरतों से जोड़ना है। केंद्र में शोध के साथ-साथ तकनीक विकास और विशेष प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध होंगे।
वाराणसी का यह केंद्र सी-डॉट की उत्कृष्टता केंद्र पहल का हिस्सा है। इससे पहले सी-डॉट ने आईआईटी कानपुर, आईआईटी गांधीनगर, आईआईटी रुड़की, आईआईटी हैदराबाद और भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के साथ ऐसे केंद्रों के लिए साझेदारी की है।
5जी से 6जी और क्वांटम संचार तक शोध
केंद्र के प्रमुख शोध क्षेत्रों में उन्नत वायरलेस संचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक और साइबर सुरक्षा शामिल हैं। यहां 5जी एडवांस्ड और 6जी, बड़े पैमाने की बहु-इनपुट बहु-आउटपुट (एमआईएमओ) प्रणालियों तथा एकीकृत संवेदन एवं संचार जैसे विषयों पर काम किया जाएगा।
एमआईएमओ तकनीक में वायरलेस संचार के लिए कई प्रेषक और प्राप्तकर्ता एंटेना इस्तेमाल किए जाते हैं। एकीकृत संवेदन एवं संचार में नेटवर्क के संसाधनों से डेटा भेजने के साथ आसपास की स्थितियों का पता लगाने का काम भी किया जाता है। प्रस्तावित शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित नेटवर्क और उपकरणों के साथ क्वांटम तथा क्वांटम-उत्तर संचार तकनीकें भी शामिल हैं। क्वांटम-उत्तर कूटलेखन का लक्ष्य ऐसे तरीके विकसित करना है जो क्वांटम कंप्यूटर से होने वाले संभावित हमलों के विरुद्ध सुरक्षित रहें।
स्वदेशी दूरसंचार क्षमता पर जोर
सी-डॉट और आईआईटी (बीएचयू) की साझेदारी का एक प्रमुख लक्ष्य भारत के संचार ढांचे के लिए स्वदेशी प्रणालियों का विकास करना है। 5जी एडवांस्ड मौजूदा 5जी तकनीक का विकसित रूप है, जबकि 6जी अगली पीढ़ी की मोबाइल संचार तकनीक को संदर्भित करता है। नेटवर्क के संचालन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मूल रूप से शामिल करने वाली प्रणालियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित नेटवर्क कहा जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सी-डॉट की स्थापना 1984 में दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास केंद्र के रूप में हुई थी।
- सी-डॉट, संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के अधीन एक स्वायत्त अनुसंधान एवं विकास केंद्र है।
- एमआईएमओ वायरलेस संचार में कई प्रेषक और प्राप्तकर्ता एंटेना का उपयोग करने वाली तकनीक है।
- आईआईटी (बीएचयू) में स्थापित केंद्र सी-डॉट का छठा उत्कृष्टता केंद्र है।
वाराणसी में स्थापित यह केंद्र दूरसंचार के उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान, तकनीक विकास और प्रशिक्षण को एक मंच पर लाएगा। इसकी साझेदारी का जोर भारत की संचार जरूरतों के अनुरूप स्वदेशी समाधानों को आगे बढ़ाने पर है।