निफ्टेम-कुंडली में खाद्य तकनीक के लिए एआई नवाचारों की पहल
हरियाणा के कुंडली स्थित राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टेम-क) ने भारत के पहले कृत्रिम बुद्धिमत्ता और खाद्य तकनीक हैकाथॉन ‘हैक द फोर्क’ की मेजबानी की। 24 घंटे का यह आयोजन 24 अक्टूबर 2026 को शुरू होकर 25 अक्टूबर को समाप्त हुआ। इसका उद्देश्य खाद्य क्षेत्र की चुनौतियों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान विकसित करना था।
खाद्य क्षेत्र की समस्याओं पर केंद्रित समाधान
फ्रांस स्थित गैर-लाभकारी संस्था हैक द फोर्क ने निफ्टेम-क के स्मार्ट प्रोटीन प्रोजेक्ट और द गुड फूड इंस्टीट्यूट इंडिया के सहयोग से यह आयोजन किया। इसमें वैकल्पिक प्रोटीन, टिकाऊ खाद्य प्रणालियों और खाद्य नवाचार से जुड़ी समस्याओं पर काम करने के लिए प्रतिभागियों को आमंत्रित किया गया।
हैकाथॉन की प्रमुख विषयवस्तुओं में देशी फसलों से वनस्पति-आधारित खाद्य उत्पादों का निर्माण, जैव-प्रसंस्करण और किण्वन को बड़े पैमाने पर अपनाना तथा आपूर्ति शृंखला, खाद्य सुरक्षा और पोषण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाधान शामिल थे। इन क्षेत्रों में आँकड़ों का विश्लेषण उत्पादन बेहतर करने, खाद्य सुरक्षा संबंधी अभिलेखों में संभावित जोखिम पहचानने और उत्पादों के निर्माण में सहायता कर सकता है।
वैकल्पिक प्रोटीन और किण्वन का महत्व
वैकल्पिक प्रोटीन से आशय ऐसे प्रोटीन स्रोतों से है जो पारंपरिक पशु-आधारित उत्पादों के विकल्प बन सकते हैं। इनमें दालों, अनाजों और तिलहनों से तैयार वनस्पति-आधारित उत्पादों के साथ किण्वन या कोशिका-संवर्धन से बने उत्पाद भी आते हैं। हैकाथॉन में देशी फसलों के उपयोग पर जोर इस बात को रेखांकित करता है कि स्थानीय कृषि संसाधन नए खाद्य उत्पादों के विकास में भूमिका निभा सकते हैं।
किण्वन में सूक्ष्मजीवों या उनके एंजाइमों की मदद से कच्चे पदार्थों में बदलाव किया जाता है। दही और ब्रेड इसके परिचित उदाहरण हैं। जैव-प्रक्रिया को बड़े पैमाने पर ले जाने का अर्थ है प्रयोगशाला या प्रायोगिक स्तर की प्रक्रिया को औद्योगिक उत्पादन के अनुकूल बनाना।
प्रतिभागिता और नवाचार को प्रोत्साहन
आयोजन के लिए 85 से अधिक टीमों ने आवेदन किया, जिनमें से 22 टीमों को अंतिम चरण के लिए चुना गया। दस राज्यों के 90 से अधिक प्रतिभागियों में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों और दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थी शामिल थे। भारत में इस आयोजन का एकमात्र विश्वविद्यालय मेजबान निफ्टेम-क था; हैकाथॉन आठ देशों के 11 विश्वविद्यालयों में आयोजित हुआ।
तीन स्थानों के लिए कुल 1.5 लाख रुपये की पुरस्कार राशि रखी गई थी। विजेता टीमों को निफ्टेम-क के स्टार्टअप इनक्यूबेशन कार्यक्रम में प्रवेश भी दिया गया। इससे प्रतिभागियों को अपने विचारों को आगे विकसित करने का अवसर मिल सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- निफ्टेम-क हरियाणा के कुंडली में स्थित है।
- ‘हैक द फोर्क 2026’ में खाद्य तकनीक और वैकल्पिक प्रोटीन से जुड़े कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाधानों पर ध्यान दिया गया।
- 85 से अधिक आवेदक टीमों में से 22 टीमों को अंतिम चरण के लिए चुना गया।
- किण्वन में सूक्ष्मजीवों या उनके एंजाइमों के जरिए कच्चे पदार्थों में परिवर्तन किया जाता है।
यह पहल खाद्य उत्पादन, सुरक्षा और पोषण से जुड़ी समस्याओं के समाधान में तकनीक तथा उद्यमिता की संभावनाएँ सामने लाती है।