आईआईटी कानपुर में रक्षा ड्रोन और रणनीतिक अनुसंधान को मिलेगा विस्तार

आईआईटी कानपुर में रक्षा ड्रोन और रणनीतिक अनुसंधान को मिलेगा विस्तार

आईआईटी कानपुर ने रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर रक्षा ड्रोन और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण घटकों के स्वदेशी विकास के लिए एक केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य उन घटकों पर विदेशी निर्भरता घटाना है, जिन्हें अभी विदेश से आयात किया जाता है। संस्थान ने अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘ग्रेटर दैन अस’ अभियान भी शुरू किया है, जिसके तहत मार्च 2029 तक 1 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।

रक्षा ड्रोन के लिए स्वदेशी तकनीक पर जोर

प्रस्तावित केंद्र में रक्षा क्षेत्र में ड्रोन के उपयोग और उनके लिए आवश्यक घटकों के देश में विकास पर ध्यान दिया जाएगा। आईआईटी कानपुर के निदेशक मनींद्र अग्रवाल के अनुसार, आयातित पुर्जों पर निर्भरता कम करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। ड्रोन ऐसा मानवरहित विमान है जिसमें चालक दल मौजूद नहीं होता। इसे दूर से नियंत्रित किया जा सकता है या स्वचालित उड़ान के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वदेशी क्षमता को केवल देश के भीतर उत्पादन तक सीमित न मानने पर जोर दिया। उनके अनुसार, इसमें तकनीक को खुद डिजाइन करने और विकसित करने की क्षमता भी शामिल है। यह दृष्टिकोण रक्षा क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण के साथ-साथ अनुसंधान और तकनीकी कौशल के विकास को भी अहम बनाता है।

सात रणनीतिक क्षेत्रों में शोध और नवाचार

आईआईटी कानपुर ने अपने धन-संग्रह अभियान के लिए सात रणनीतिक क्षेत्र चुने हैं। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, ड्रोन, चिकित्सा प्रौद्योगिकी, टिकाऊ तकनीक, क्वांटम तकनीक और अर्धचालक शामिल हैं। अभियान से अनुसंधान परियोजनाओं को सहायता देने, प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं की भर्ती करने तथा प्रयोगशालाओं और अन्य शोध सुविधाओं के विकास की योजना है।

संस्थान में रक्षा अनुसंधान के तहत विशेष स्टेल्थ सामग्री और क्वांटम संवेदन पर भी काम हो रहा है। क्वांटम मैग्नेटोमीटर चुंबकीय क्षेत्र मापने वाले उपकरण हैं। आईआईटी कानपुर में इस तकनीक के संभावित उपयोगों में पनडुब्बियों की गतिविधियों का पता लगाना शामिल है। साइबर सुरक्षा का संबंध कंप्यूटर प्रणालियों, नेटवर्क और डेटा को डिजिटल हमलों से बचाने से है, जबकि अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में विद्युत धारा के प्रवाह को नियंत्रित करने वाले पदार्थ हैं।

रक्षा अनुसंधान के लिए सहयोग और वित्तपोषण

आईआईटी कानपुर का डीआरडीओ-उद्योग-अकादमिक उत्कृष्टता केंद्र रक्षा अनुसंधान, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों को जोड़ने वाला सहयोग मॉडल है। राजनाथ सिंह ने संस्थान में रक्षा प्रौद्योगिकी स्कूल स्थापित करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने निजी क्षेत्र को अनुसंधान और उन्नत तकनीकों में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने वाली अनुसंधान, विकास और नवाचार योजना के लिए 1 लाख करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आईआईटी कानपुर की स्थापना वर्ष 1959 में हुई थी।
  • प्रस्तावित रक्षा ड्रोन केंद्र रक्षा मंत्रालय के सहयोग से विकसित किया जाएगा।
  • ‘ग्रेटर दैन अस’ अभियान का लक्ष्य मार्च 2029 तक 1 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाना है।
  • अनुसंधान, विकास और नवाचार योजना के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का परिव्यय मंजूर किया गया है। आईआईटी कानपुर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान अधिनियम, 1961 के तहत राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है।

ड्रोन केंद्र, शोध के सात प्राथमिक क्षेत्र और वित्तपोषण की योजनाएं मिलकर रक्षा तकनीक में स्वदेशी डिजाइन, अनुसंधान और विकास को गति देने का प्रयास हैं।

Originally written on October 15, 2026 and last modified on October 15, 2026.

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