आइसक्यूब की खोज से ब्रह्मांड के चरम रहस्यों की नई पड़ताल
अंटार्कटिका स्थित आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला ने ऐसे ब्रह्मांडीय न्यूट्रिनो दर्ज किए हैं जिनकी ऊर्जा सामान्य सौर न्यूट्रिनो से लगभग 10 अरब गुना अधिक है। वैज्ञानिकों ने 2 नवंबर 2026 को इस खोज की जानकारी दी। अत्यंत ऊर्जावान न्यूट्रिनो दुर्लभ हैं और उनकी उत्पत्ति तथा उन्हें इतनी ऊर्जा देने वाली प्रक्रियाएं अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।
बर्फ के भीतर दर्ज होते हैं नीले प्रकाश के संकेत
आइसक्यूब को अंटार्कटिका की बर्फ के भीतर लगभग एक घन किलोमीटर क्षेत्र में स्थापित किया गया है। इसमें लगे संवेदनशील प्रकाश उपकरण न्यूट्रिनो की सीधे तस्वीर नहीं लेते। जब कोई न्यूट्रिनो बर्फ के परमाणु से अंतःक्रिया करता है, तो उससे आवेशित कण पैदा हो सकता है। यह कण बर्फ में तेज गति से गुजरते हुए चेरेंकोव विकिरण के रूप में नीली चमक उत्पन्न करता है। वेधशाला इसी क्षणिक प्रकाश को दर्ज करके न्यूट्रिनो की मौजूदगी और गुणों का अनुमान लगाती है।
सबसे अधिक ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो इतने कम मिलते हैं कि आइसक्यूब हर साल उनमें से केवल कुछ दर्जन ही देख पाता है। न्यूट्रिनो पदार्थ के साथ बहुत कम अंतःक्रिया करते हैं। इस कारण वे तारों के ढहने और ब्लैक होल के आसपास जैसे अत्यंत उग्र क्षेत्रों से बाहर निकलकर लंबी दूरी तय कर सकते हैं। इस गुण से वे उन घटनाओं की जानकारी पहुंचा सकते हैं जिन्हें प्रकाश या अन्य विकिरणों से समझना कठिन होता है।
चरम खगोलीय घटनाओं को समझने में मदद
उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो का अध्ययन वैज्ञानिकों को यह जानने में मदद कर सकता है कि ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली घटनाओं में कण कैसे बनते और तेज होते हैं। इन कणों के स्रोत और त्वरण की प्रक्रिया अब भी शोध का विषय हैं। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन डिएगो के भौतिक विज्ञानी जॉर्ज फुलर ने भी इनके उद्गम और ऊर्जा प्राप्त करने के तरीकों को अभी कम समझा गया क्षेत्र बताया है। न्यूट्रिनो से मिली जानकारी चरम खगोलीय घटनाओं की पड़ताल के साथ-साथ ब्रह्मांड के शुरुआती इतिहास, यहां तक कि महाविस्फोट से जुड़े सवालों की जांच में भी उपयोगी हो सकती है।
आइसक्यूब की वैज्ञानिक उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय पहचान
भौतिक विज्ञानी फ्रांसिस हल्ज़ेन को 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार आइसक्यूब में उनके निर्णायक योगदान और खगोलीय स्रोतों से आने वाले उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज के लिए दिया गया। यह सम्मान कण भौतिकी और खगोल विज्ञान के मेल से विकसित इस वेधशाला की अहमियत को रेखांकित करता है। आइसक्यूब के मापन से वैज्ञानिक न्यूट्रिनो के प्रकार और आकाश में उनके संभावित स्रोतों का अध्ययन भी कर सकते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
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- आइसक्यूब के डिजिटल प्रकाश मॉड्यूल 60-60 उपकरणों की कतारों में लगाए गए हैं। ये गर्म पानी से बर्फ में बनाए गए छेदों में 1,450 से 2,450 मीटर की गहराई पर स्थित हैं।
- आवेशित-कण वाली अंतःक्रियाओं में इलेक्ट्रॉन, म्यूऑन और टाउ कणों के अलग-अलग संकेतों से न्यूट्रिनो का प्रकार पहचाना जा सकता है।
- आइसक्यूब का सघन रूप से उपकरणों से युक्त डीपकोर क्षेत्र 100 गीगाइलेक्ट्रॉन-वोल्ट से कम ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो का अध्ययन संभव बनाता है।
- आइसक्यूब सभी दिशाओं से आने वाले न्यूट्रिनो देख सकता है, लेकिन दक्षिणी आकाश में ब्रह्मांडीय किरणों से बने म्यूऑन का व्यवधान स्रोतों की पहचान को कठिन करता है।
अंटार्कटिका की बर्फ में दर्ज ये दुर्लभ संकेत ब्रह्मांड के उन क्षेत्रों की जानकारी दे सकते हैं जहां तक पारंपरिक खगोलीय अवलोकन सीमित हैं।