अमूर फाल्कन की 20 हजार किमी वापसी से प्रवास मार्गों पर नई जानकारी
उपग्रह से निगरानी किए जा रहे दो अमूर फाल्कन—अपापांग और अलांग—22 अक्टूबर 2026 को मणिपुर लौट आए। दोनों पक्षियों ने 23 देशों से होकर लगभग 20,000 किलोमीटर का आवागमन पूरा किया। उनकी यात्रा का रिकॉर्ड प्रवासी पक्षियों के लंबी दूरी के मार्गों और ठहराव स्थलों की जानकारी देता है।
समुद्र के ऊपर छह दिन की चुनौतीपूर्ण उड़ान
अपापांग और अलांग ने पूर्वोत्तर भारत और सोमालिया के बीच करीब 6,000 किलोमीटर की लगातार उड़ान भरी। यह उड़ान छह दिन चली और इसमें लगभग 3,000 किलोमीटर का हिस्सा अरब सागर के ऊपर से था। उपग्रह संकेतों से वैज्ञानिकों को दोनों पक्षियों की वापसी की पुष्टि हुई।
मणिपुर का तामेंगलोंग जिला अमूर फाल्कन के प्रवास के दौरान पड़ाव क्षेत्रों में शामिल है। दोनों पक्षियों के यहां पहाड़ी इलाकों में दो से तीन सप्ताह बिताने की उम्मीद है। इस दौरान उपलब्ध दीमक जैसे कीट लंबी उड़ान से पहले उनके शरीर में ऊर्जा और वसा का भंडार बढ़ाने में मदद करते हैं।
चीन और रूस से दक्षिणी अफ्रीका तक मौसमी प्रवास
अमूर फाल्कन, जिसका वैज्ञानिक नाम Falco amurensis है, शिकारी पक्षियों की एक प्रवासी प्रजाति है। यह उत्तर-पूर्वी चीन और रूस के सुदूर पूर्वी हिस्सों में प्रजनन करती है। सर्दियों में यह दक्षिणी अफ्रीका की ओर जाती है। पक्षी सामान्यतः नवंबर-दिसंबर तक वहां पहुंचते हैं और मार्च-अप्रैल तक रहते हैं; इसके बाद अप्रैल-मई में प्रजनन क्षेत्रों की ओर लौटते हैं।
दक्षिणी अफ्रीका में इनके प्रवास क्षेत्र में बोत्सवाना, जिम्बाब्वे और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। इनके भोजन में मुख्य रूप से दीमक, चींटियां, टिड्डे और भृंग आते हैं। ये कभी-कभी चूहे, छोटे पक्षी और छिपकलियां भी खाती हैं।
उपग्रह निगरानी और स्थानीय संरक्षण की भूमिका
भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने नवंबर 2025 में मणिपुर के तामेंगलांग जिले के चिउलुआन बसेरा स्थल पर अपापांग, अलांग और आहू नाम के तीन फाल्कन पर उपग्रह प्रेषित्र लगाए थे। निगरानी से पक्षियों की आवाजाही, पड़ाव स्थलों और वहां बिताए समय का पता चलता है। आहू का संकेत 2026 में सोमालिया में मिलना बंद हो गया था।
अमूर फाल्कन संरक्षण पहल 2013 में नागालैंड में प्रवास के दौरान होने वाले शिकार को रोकने के लिए शुरू हुई थी। बाद में इसका विस्तार मणिपुर और असम तक हुआ। बसेरा और पड़ाव स्थलों की सुरक्षा में स्थानीय समुदायों की भागीदारी इस पहल का अहम हिस्सा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अमूर फाल्कन का वैज्ञानिक नाम Falco amurensis है।
- इसका प्रजनन क्षेत्र उत्तर-पूर्वी चीन और रूस का सुदूर पूर्व है, जबकि शीतकालीन प्रवास दक्षिणी अफ्रीका में होता है।
- अरब सागर भारतीय उपमहाद्वीप और अरब प्रायद्वीप के बीच स्थित है।
- भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून, उत्तराखंड में स्थित है।
अपापांग और अलांग की वापसी से इस प्रजाति के अंतरमहाद्वीपीय प्रवास का एक विस्तृत रिकॉर्ड मिला है। स्थानीय संरक्षण और वैज्ञानिक निगरानी मिलकर इनके सुरक्षित पड़ावों की पहचान में मदद कर सकते हैं।