इंडोनेशिया की आग से प्रागैतिहासिक गुफा-कला पर खतरा

इंडोनेशिया की आग से प्रागैतिहासिक गुफा-कला पर खतरा

इंडोनेशिया के दक्षिण सुलावेसी प्रांत में स्थित मारोस-पांगकेप राष्ट्रीय उद्यान के 270 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में 30 सितंबर से 18 अक्टूबर 2026 के बीच जंगल की आग फैल गई। आग उन गुफाओं से लगभग 800 मीटर की दूरी तक पहुंची, जिनमें प्रागैतिहासिक चित्र मौजूद हैं। आग की लपटें गुफाओं तक न पहुंचें, तब भी गर्मी और धुएं से इन कलाकृतियों को नुकसान हो सकता है।

आग की चपेट में विरासत वाला क्षेत्र

मारोस-पांगकेप दक्षिण सुलावेसी में चूना-पत्थर की संरचनाओं वाले करास्ट भू-दृश्य का हिस्सा है। यहां की गुफाएं भूवैज्ञानिक विशेषताओं के साथ पुरातात्विक धरोहर के लिए भी जानी जाती हैं। राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क का दर्जा प्राप्त है। यह दर्जा ऐसे भौगोलिक क्षेत्र को दिया जाता है, जहां अंतरराष्ट्रीय महत्व के भूवैज्ञानिक स्थल मौजूद हों।

उद्यान की एक गुफा में मानव जैसी आकृतियों को सूअर के साथ दर्शाने वाली चित्रकला मिली है। शोधकर्ताओं ने इसे कम-से-कम 51,200 वर्ष पुराना बताया है। पास के सुलावेसी द्वीप से अलग, उसके निकट स्थित मुना द्वीप की एक गुफा में लाल रंग की हाथ-छाप को कम-से-कम 67,800 वर्ष पुराना आंका गया है। ये कलाकृतियां प्राचीन मानव कला के ज्ञात उदाहरणों में शामिल हैं।

गर्मी और धुएं से चित्रों को कैसे नुकसान

पुरातत्वविद् बासरान बुरहान के अनुसार, आग से पैदा होने वाले तापमान में बदलाव गुफा-चित्रों के लिए जोखिम है। धुएं के साथ आने वाली कालिख चित्रों की सतह पर जम सकती है। इससे आकृतियां धुंधली पड़ सकती हैं और उनकी पहचान करना कठिन हो सकता है। इसलिए आग का गुफा की दीवारों तक पहुंचना ही एकमात्र खतरा नहीं है।

अग्निशमनकर्मी मुहम्मद इखफार ने बताया कि अक्टूबर की शुरुआत में मारोस-पांगकेप क्षेत्र के पास आग एक सप्ताह से अधिक समय तक सक्रिय रही। 22 और 23 अक्टूबर को उद्यान के अन्य हिस्सों में आग बुझाने का काम जारी था और बारिश न होने से सूखे हालात बने हुए थे। उपलब्ध जानकारी में उद्यान के कुछ हिस्सों के जलने की पुष्टि है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि गुफाएं या चित्र स्वयं आग में जल गए।

सूखे मौसम ने बढ़ाई आग की आशंका

इंडोनेशिया में 2015 के बाद से जंगल और भूमि की सबसे तीव्र आग की स्थिति बताई गई है। गंभीर एल नीनो के दौरान ऊंचे तापमान और कम वर्षा के कारण जंगल तथा पीटलैंड अधिक शुष्क और आग के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं। इस बार आग ने सुलावेसी समेत कई द्वीपों को प्रभावित किया। ऐसी परिस्थितियों में प्राकृतिक और पुरातात्विक विरासत वाले क्षेत्रों की निगरानी तथा आग पर शीघ्र नियंत्रण विशेष महत्व रखता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सुलावेसी इंडोनेशिया का एक द्वीप है और दक्षिण सुलावेसी उसके प्रांतों में से एक है।
  • एल नीनो मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के औसत से अधिक गर्म होने से जुड़ा आवर्ती जलवायु पैटर्न है।
  • करास्ट भू-दृश्य प्रायः चूना-पत्थर जैसी घुलनशील चट्टानों में विकसित होता है।
  • मुना द्वीप की गुफा में मिली हाथ-छाप कम-से-कम 67,800 वर्ष पुरानी आंकी गई है।

मारोस-पांगकेप की आग ने दिखाया है कि जंगल की आग का खतरा वन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। धुएं, कालिख और तापमान में बदलाव से हजारों वर्ष पुरानी गुफा-कला भी प्रभावित हो सकती है।

Originally written on October 24, 2026 and last modified on October 24, 2026.

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