बेटा पिक्टोरिस b से रेडियो संकेत: बाह्यग्रहों के चुंबकीय क्षेत्र समझने में बड़ी छलांग
खगोलविदों ने पहली बार किसी बाह्यग्रह से सीधे रेडियो संकेत दर्ज किए हैं। यह संकेत पृथ्वी से लगभग 63 से 64 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित गैस दानव ग्रह बेटा पिक्टोरिस b से मिले हैं। दक्षिण अफ्रीका के MeerKAT रेडियो टेलीस्कोप ऐरे की मदद से की गई यह खोज बाह्यग्रहों के अध्ययन में एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि इससे किसी ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र का प्रत्यक्ष संकेत मिला है।
क्या है बेटा पिक्टोरिस b और क्यों खास है
बेटा पिक्टोरिस b, अपने युवा तारे बेटा पिक्टोरिस की परिक्रमा करता है, जो पिक्टर तारामंडल में स्थित है। यह एक विशाल गैस दानव है और अपनी बहुत तेज घूर्णन गति के लिए जाना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह ग्रह लगभग 8 से 9 घंटे में एक पूरा चक्कर लगा लेता है। यह विशेषता इसे अध्ययन के लिए और भी दिलचस्प बनाती है, क्योंकि तेज घूर्णन और चुंबकीय गतिविधि के बीच गहरा संबंध हो सकता है।
रेडियो संकेतों से क्या पता चला
मिले हुए रेडियो उत्सर्जन को ग्रह पर होने वाली शक्तिशाली अरोरा गतिविधियों से जोड़ा गया है। अरोरा तब बनते हैं जब आवेशित कण किसी ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं। इन संकेतों में मजबूत वृत्तीय ध्रुवण भी देखा गया, जो चुंबकीय विकिरण का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। शोधकर्ताओं ने रेडियो छवियों की तुलना दूरस्थ क्वासरों की सटीक स्थितियों से की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संकेत तारे से नहीं बल्कि सीधे ग्रह से आए हैं।
खगोल विज्ञान के लिए यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है
यह अध्ययन इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे किसी बाह्यग्रह के चुंबकीय क्षेत्र का पहला प्रत्यक्ष मापन संभव हुआ है। वैज्ञानिकों के अनुसार बेटा पिक्टोरिस b का चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी की तुलना में कम से कम 1,250 गुना अधिक शक्तिशाली है। यह तथ्य ग्रहों के वायुमंडल, अंतरिक्ष मौसम और ग्रहों की दीर्घकालिक स्थिरता को समझने में मदद कर सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- बाह्यग्रह वह ग्रह होता है जो सौरमंडल के बाहर किसी तारे की परिक्रमा करता है।
- MeerKAT रेडियो टेलीस्कोप ऐरे दक्षिण अफ्रीका में स्थित है और स्क्वेयर किलोमीटर ऐरे के पाथफाइंडर कार्यक्रम का हिस्सा है।
- वृत्तीय ध्रुवण विद्युतचुंबकीय तरंगों का ऐसा गुण है, जिसमें विद्युत क्षेत्र गोलाकार पैटर्न में घूमता है।
- बृहस्पति सौरमंडल का वह ग्रह है जो अपने शक्तिशाली अरोरा-जनित रेडियो उत्सर्जन के लिए सबसे अधिक जाना जाता है।
यह खोज बाह्यग्रहों की चुंबकीय प्रकृति को समझने की दिशा में एक नया अध्याय खोलती है। आने वाले समय में ऐसे अवलोकन यह बताने में मदद कर सकते हैं कि दूर स्थित ग्रहों का वातावरण और चुंबकीय ढाल कितनी मजबूत है।