सुजीत कलकल की ऐतिहासिक वापसी से भारत को एशियाई खेलों में कुश्ती स्वर्ण
हरियाणा के 23 वर्षीय फ्रीस्टाइल पहलवान सुजीत कलकल ने एशियाई खेल 2026 में भारत के लिए बड़ा पदक जीतते हुए पुरुषों की 65 किलोग्राम स्पर्धा में स्वर्ण हासिल किया। जापान के आइची-नागोया में 2 अक्टूबर 2026 को खेले गए फाइनल में उन्होंने ताजिकिस्तान के अब्दुलमाजिद कुडिएव को 10-9 से हराया। मुकाबले के अंतिम क्षणों में सुजीत 2-9 से पीछे थे, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए जीत अपने नाम की।
फाइनल में दबाव के बीच यादगार वापसी
यह जीत सिर्फ एक स्वर्ण पदक नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और तकनीकी कौशल का भी उदाहरण रही। जब मुकाबला लगभग हाथ से निकलता दिख रहा था, तब सुजीत ने आखिरी 1 मिनट 40 सेकंड में आक्रामक खेल दिखाया और स्कोर पलट दिया। कुश्ती जैसे खेल में ऐसी वापसी खिलाड़ियों की फिटनेस, रणनीति और आत्मविश्वास को दर्शाती है।
सुजीत ने सेमीफाइनल में जापान के कोटारो कियोका को हराया था, जो मौजूदा ओलंपिक चैंपियन हैं। इस जीत ने उनके फाइनल तक के सफर को और भी खास बना दिया।
हरियाणा की कुश्ती परंपरा और सुजीत का सफर
सुजीत कलकल का जन्म 5 नवंबर 2002 को हुआ था और उन्होंने हरियाणा के इमलोता गांव के स्थानीय अखाड़े से कुश्ती शुरू की। उनके पिता दयानंद कलकल राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रह चुके हैं और शुरुआती कोच भी वही रहे। यह पृष्ठभूमि बताती है कि भारतीय कुश्ती में पारिवारिक और स्थानीय अखाड़ों की भूमिका कितनी अहम रही है।
सुजीत पहले भी अपनी क्षमता का परिचय दे चुके हैं। उनके प्रमुख खिताबों में 2026 की सीनियर एशियाई चैंपियनशिप और 2025 का विश्व अंडर-23 खिताब शामिल है। इन उपलब्धियों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित किया।
भारत और एशियाई खेलों में 65 किलोग्राम वर्ग का महत्व
फ्रीस्टाइल कुश्ती ओलंपिक कुश्ती की दो प्रमुख शैलियों में से एक है, दूसरी ग्रीको-रोमन है। इसमें खिलाड़ी पैरों का उपयोग आक्रमण और बचाव दोनों में कर सकते हैं। अंक टेकडाउन, एक्सपोजर, रिवर्सल और पेनल्टी के आधार पर दिए जाते हैं।
पुरुषों की 65 किलोग्राम स्पर्धा अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में एक प्रमुख भार वर्ग मानी जाती है और एशियाई खेलों, विश्व चैंपियनशिप तथा आयु-समूह प्रतियोगिताओं में इसका विशेष महत्व रहा है। भारत के लिए यह वर्ग पहले भी सफल रहा है, क्योंकि इसी श्रेणी में योगेश्वर दत्त ने 2014 और बजरंग पुनिया ने 2018 में एशियाई खेलों का स्वर्ण जीता था।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एशियाई खेल एशिया का प्रमुख बहु-खेल आयोजन है, जिसका संचालन ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया करती है।
- फ्रीस्टाइल कुश्ती में खिलाड़ी पैरों का उपयोग आक्रमण और बचाव दोनों में कर सकते हैं।
- पुरुषों की 65 किलोग्राम श्रेणी अंतरराष्ट्रीय कुश्ती की मान्यता प्राप्त भार श्रेणियों में शामिल है।
- भारत ने इस वर्ग में पहले भी एशियाई खेलों में स्वर्ण जीता है, जिससे यह श्रेणी भारतीय कुश्ती के लिए अहम मानी जाती है।
सुजीत कलकल की यह जीत भारतीय कुश्ती के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है। हरियाणा की अखाड़ा परंपरा से निकले इस पहलवान ने साबित किया कि बड़े मंच पर भी धैर्य और जुझारूपन से मुकाबला पलटा जा सकता है।