VIMARSH 2026 में रक्षा उद्योग को नई रफ्तार देने वाली पहल
रक्षा मंत्रालय ने नई दिल्ली में आयोजित डीआरडीओ-उद्योग समन्वय बैठक VIMARSH 2026 के दौरान सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) तथा डीप-टेक स्टार्ट-अप्स के लिए कई नीतिगत पहलें पेश कीं। इन कदमों का उद्देश्य रक्षा निर्माण, तकनीक हस्तांतरण, परीक्षण सुविधाओं तक पहुंच और उद्योग की भागीदारी को मजबूत करना है।
MSME और स्टार्ट-अप के लिए खुलते नए अवसर
नई व्यवस्था के तहत पात्र MSMEs और स्टार्ट-अप्स को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन सपोर्ट और DRDO की परीक्षण सुविधाओं तक पहुंच देने की बात कही गई है। इससे रक्षा क्षेत्र में प्रवेश से जुड़ी तकनीकी और वित्तीय बाधाएं कम होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि डीप-टेक स्टार्ट-अप्स कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, सेंसर, साइबर सिस्टम और उन्नत सामग्री जैसी तकनीकों पर काम करते हैं, जो आधुनिक रक्षा जरूरतों से सीधे जुड़ी हैं।
तकनीक हस्तांतरण और औद्योगिक भागीदारी पर जोर
कार्यक्रम में 13 विनिर्माण साझेदारों को तकनीक हस्तांतरण के लिए नौ लाइसेंसिंग समझौते यानी LAToT सौंपे गए। DRDO की विकसित स्वदेशी तकनीकों को भारतीय उद्योग तक पहुंचाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। इसके साथ ही DRDO द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर के स्रोत कोड को लाइसेंसी उद्योगों के साथ साझा करने के लिए एक मानकीकृत और सुरक्षित ढांचा भी शुरू किया गया। यह कदम सॉफ्टवेयर-आधारित रक्षा क्षमताओं और तकनीकी अप्रचलन के प्रबंधन के लिहाज से अहम है।
उद्योग मूल्यांकन और साझेदारी का विस्तार
रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में व्यापक भागीदारी बढ़ाने के लिए Society of Indian Defence Manufacturers और Laghu Udyog Bharati के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया। इससे बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे औद्योगिक हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों को भी रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ने का रास्ता खुला है। इसी क्रम में DRDO ने Quality Council of India के साथ SAMAR 2.0 के लिए अनुबंध भी किया। यह प्रणाली घरेलू रक्षा उद्यमों की विनिर्माण परिपक्वता का आकलन और मानकीकरण करने में उपयोगी है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- DRDO का पूरा नाम Defence Research and Development Organisation है और यह रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- VIMARSH 2026 का आयोजन नई दिल्ली में हुआ और इसकी थीम “Varta se Vikas” थी।
- LAToT यानी Licensing Agreements for Transfer of Technology, DRDO तकनीकों को उद्योग तक पहुंचाने का माध्यम है।
- Quality Council of India गुणवत्ता मानकों, मान्यता और आकलन प्रणालियों से जुड़ा राष्ट्रीय निकाय है।
कुल मिलाकर, VIMARSH 2026 में घोषित पहलें भारत के रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण, निजी क्षेत्र की भागीदारी और तकनीकी आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।