280 प्रकाश-वर्ष दूर मिला दुर्लभ पीत-हरित श्वेत बौना तारा

280 प्रकाश-वर्ष दूर मिला दुर्लभ पीत-हरित श्वेत बौना तारा

खगोलविदों ने ड्रेको तारामंडल में पृथ्वी से लगभग 280 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित श्वेत बौने तारे WD J1330+6435 की पहचान की है। इसका रंग मानव आंखों को पीत-हरित यानी चार्ट्रूज़ जैसा दिखाई देने का अनुमान है। यह निष्कर्ष अक्टूबर 2026 में घोषित किया गया। अध्ययन का नेतृत्व इंग्लैंड स्थित वारविक विश्वविद्यालय के खगोलभौतिकविद् मार्क हॉलैंड्स ने किया।

तारे का रंग क्यों है खास?

WD J1330+6435 का रंग किसी सामान्य तस्वीर में सीधे हरा दिखाई देने के आधार पर तय नहीं किया गया। शोधकर्ताओं ने इसके प्रकाश के वर्णक्रमीय आंकड़ों और मानव रंग-बोध के मॉडलों का उपयोग कर यह अनुमान निकाला। किसी तारे का दिखने वाला रंग उसके तापमान के साथ-साथ उसके वायुमंडल में मौजूद पदार्थों द्वारा प्रकाश के अवशोषण से भी प्रभावित होता है।

इस तारे की सतह का अनुमानित तापमान लगभग 4,000 डिग्री सेल्सियस है। शोध के अनुसार, इसके अत्यंत घने वायुमंडल में सोडियम और हीलियम की परस्पर क्रिया प्रकाश की कुछ तरंगदैर्घ्य को प्रभावित करती है। इसी प्रक्रिया से इसके असामान्य पीत-हरित रंग की व्याख्या की गई है।

वायुमंडल में मिले ग्रहों के अवशेष

तारे के वायुमंडल में सोडियम के अलावा कैल्शियम और लिथियम भी पाए गए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये तत्व चट्टानी ग्रहों के मलबे से आए होंगे, जो तारे की ग्रह-व्यवस्था के बाधित होने के बाद उसमें समा गया। इस तरह श्वेत बौने के वायुमंडल का अध्ययन उसके आसपास रहे ग्रहों के इतिहास के संकेत भी दे सकता है।

इसी अध्ययन में WD J1011+2845 नामक एक अन्य श्वेत बौने की भी पहचान की गई। यह सिंह लघु तारामंडल में पृथ्वी से लगभग 48 प्रकाश-वर्ष दूर है। इसके वायुमंडल में कार्बन की मौजूदगी को उसके दुर्लभ सैल्मन-गुलाबी रंग से जोड़ा गया है। अध्ययन रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की पत्रिका ‘आरएएस टेक्नीक्स एंड इंस्ट्रूमेंट्स’ में प्रकाशित हुआ।

श्वेत बौने तारों का वैज्ञानिक महत्व

श्वेत बौना किसी तारे के जीवन के अंतिम चरण में बाहरी परतें खोने के बाद बचा सघन अवशेष होता है। आकार में यह लगभग पृथ्वी के बराबर हो सकता है, लेकिन इसमें मूल तारे के द्रव्यमान का बड़ा हिस्सा सिमटा रहता है। गुरुत्वीय संकुचन के विरुद्ध इसे इलेक्ट्रॉन अपसारी दाब सहारा देता है। ऐसे तारों की रासायनिक संरचना और प्रकाश का अध्ययन तारकीय विकास तथा ग्रह-व्यवस्थाओं के अवशेषों को समझने में मदद करता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एक प्रकाश-वर्ष वह दूरी है, जिसे प्रकाश निर्वात में एक वर्ष के दौरान तय करता है।
  • श्वेत बौने तारों के अंतिम अवशेष हैं; वे ग्रह या मुख्य-अनुक्रम के तारे नहीं हैं।
  • वर्णक्रमिकी में प्रकाश की अलग-अलग तरंगदैर्घ्यों का विश्लेषण कर खगोलीय पिंडों की संरचना का पता लगाया जाता है।
  • ड्रेको और सिंह लघु, दोनों उत्तरी खगोलीय गोलार्ध के तारामंडल हैं।

इन दोनों श्वेत बौनों के अलग-अलग रंग दिखाते हैं कि तारों के वायुमंडल की रासायनिक बनावट उनके प्रकाश को किस तरह बदल सकती है।

Originally written on October 19, 2026 and last modified on October 19, 2026.

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