अंतरतारकीय धूल के रहस्य खोलेगा नासा का PUFFINS मिशन

अंतरतारकीय धूल के रहस्य खोलेगा नासा का PUFFINS मिशन

नासा का PUFFINS मिशन अंतरतारकीय धूल के सूक्ष्म कणों का अध्ययन करेगा। यह छोटा उपग्रह पराबैंगनी प्रकाश के ध्रुवण को मापकर समझेगा कि धूल के कण तारों और ग्रहों के निर्माण में क्या भूमिका निभाते हैं। मिशन को नासा के एस्ट्रोफिजिक्स पायनियर्स कार्यक्रम के तहत चुना गया है। इसके लिए 2 करोड़ डॉलर का बजट निर्धारित है और प्रक्षेपण अप्रैल 2030 में प्रस्तावित है।

छोटे उपग्रह से लगभग 70 तारों का अध्ययन

PUFFINS का पूरा नाम ‘पोलरिमेट्री इन द अल्ट्रावायलेट टू फाइंड फीचर्स इन इंटरस्टेलर डस्ट’ है। इसमें 10 इंच की दूरबीन होगी, जिसकी मदद से करीब 70 तारों से आने वाले पराबैंगनी प्रकाश का निरीक्षण किया जाएगा। मिशन का खास ध्यान अंतरतारकीय धूल के सबसे छोटे कणों पर रहेगा।

इस काम के लिए पराबैंगनी स्पेक्ट्रोपोलरिमेट्री का उपयोग होगा। इसमें प्रकाश की अलग-अलग तरंगदैर्घ्य और उसके ध्रुवण—दोनों का मापन किया जाता है। पराबैंगनी विकिरण की तरंगदैर्घ्य दृश्य बैंगनी प्रकाश से कम होती है; इसकी सामान्य सीमा लगभग 10 से 400 नैनोमीटर मानी जाती है। इस प्रकाश का अध्ययन तारों और उनके बीच मौजूद पदार्थ के बारे में जानकारी देता है।

धूल, तारों की रोशनी और चुंबकीय क्षेत्र

अंतरतारकीय माध्यम में गैस के साथ छोटे ठोस कण भी फैले रहते हैं। ये धूलकण तारों की रोशनी को सोखते और बिखेरते हैं। इस प्रभाव को अंतरतारकीय विलुप्ति कहा जाता है। छोटी तरंगदैर्घ्य वाला प्रकाश आम तौर पर अधिक प्रभावित होता है, इसलिए दूरस्थ तारे से मिलने वाली रोशनी अपेक्षाकृत लाल दिखाई दे सकती है।

धूल के कण चुंबकीय क्षेत्र के साथ एक दिशा में व्यवस्थित हो सकते हैं। उनसे होकर गुजरने वाले तारकीय प्रकाश में ध्रुवण पैदा हो सकता है। पराबैंगनी तरंगदैर्घ्यों पर ध्रुवण के मापन से कणों के आकार, गुण और उनके व्यवस्थित होने के ढंग का पता लगाने में मदद मिलेगी। इससे वैज्ञानिक अंतरतारकीय धूल और चुंबकीय क्षेत्रों के संबंध को बेहतर समझ सकेंगे।

ग्रह निर्माण और जीवन की खोज से संबंध

तारों और ग्रहों की उत्पत्ति आणविक बादलों में मौजूद गैस तथा धूल से जुड़ी है। ग्रह-तंत्र बनने की प्रक्रिया में धूल के कण आपस में जुड़कर बड़े पिंड बना सकते हैं। PUFFINS इन कणों के गुणों का अध्ययन करके तारा और ग्रह निर्माण की प्रक्रियाओं पर जानकारी जुटाएगा। मिशन का उद्देश्य जीवन की खोज सीधे करना नहीं है; यह उन धूल-गुणों और परिस्थितियों को समझने में मदद करेगा जो जीवन के अनुकूल वातावरण से जुड़ी हो सकती हैं।

इस मिशन में एरिजोना विश्वविद्यालय, मैकडोनाल्ड वेधशाला और अन्य वैज्ञानिक संस्थान सहयोग कर रहे हैं। बेंगलुरु से संबंध रखने वाली भारतीय मूल की वैज्ञानिक डॉ. रम्या मंजुनाथ अंचे इसकी प्रमुख अन्वेषक हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • PUFFINS नासा के एस्ट्रोफिजिक्स पायनियर्स कार्यक्रम में चुना गया एक छोटा उपग्रह मिशन है।
  • मिशन में 10 इंच की दूरबीन से लगभग 70 तारों का निरीक्षण किया जाएगा।
  • अंतरतारकीय विलुप्ति धूल द्वारा तारों के प्रकाश के अवशोषण और प्रकीर्णन से जुड़ी है।
  • स्पेक्ट्रोपोलरिमेट्री में प्रकाश की तरंगदैर्घ्य और ध्रुवण का संयुक्त मापन होता है।

PUFFINS के अवलोकन अंतरतारकीय धूल और ग्रह-निर्माण के बीच संबंधों पर नई जानकारी दे सकते हैं। इसका महत्व इस बात में है कि यह जीवन की संभावनाओं से जुड़े ब्रह्मांडीय वातावरण को समझने के लिए धूल के सूक्ष्म गुणों की पड़ताल करेगा।

Originally written on October 19, 2026 and last modified on October 19, 2026.

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