स्पाडेक्स मिशन पूरा, भारत की अंतरिक्ष डॉकिंग क्षमता का सफल प्रदर्शन
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के स्पाडेक्स मिशन के दोनों उपग्रह एसडीएक्स01 और एसडीएक्स02 ने 12 अक्टूबर 2026 को पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश किया। दोनों उपग्रह लगभग सात घंटे के अंतर से अलग-अलग क्षेत्रों में वायुमंडल में दाखिल हुए। इस घटनाक्रम के साथ करीब 21 महीने चला मिशन पूरा हो गया।
कक्षीय डॉकिंग में भारत की उपलब्धि
स्पाडेक्स का पूरा नाम अंतरिक्ष डॉकिंग प्रयोग है। इसरो ने 30 दिसंबर 2024 को श्रीहरिकोटा से ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) के जरिए एसडीएक्स01 और एसडीएक्स02 को प्रक्षेपित किया था। प्रत्येक उपग्रह का वजन लगभग 220 किलोग्राम था। मिशन का उद्देश्य अंतरिक्ष में दो यानों के पास आने, एक-दूसरे के साथ जुड़ने, फिर अलग होने और उनके बीच विद्युत ऊर्जा के आदान-प्रदान जैसी क्षमताओं का परीक्षण करना था।
इसरो ने 16 जनवरी 2025 को दोनों उपग्रहों की पहली डॉकिंग सफलतापूर्वक पूरी की। इस उपलब्धि के साथ भारत अंतरिक्ष डॉकिंग का प्रदर्शन करने वाला दुनिया का चौथा देश बना। इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन यह क्षमता हासिल कर चुके थे।
स्वचालित जुड़ाव और ऊर्जा हस्तांतरण
डॉकिंग से पहले अंतरिक्ष यानों को एक ही कक्षीय क्षेत्र में लाने और उनकी गति तथा स्थिति का तालमेल बैठाने की प्रक्रिया को मिलन कहा जाता है। इसके बाद दोनों यानों का भौतिक रूप से जुड़ना डॉकिंग कहलाता है। स्वचालित डॉकिंग में यान पर लगे उपकरण और प्रणालियां, हर गतिविधि के लिए पृथ्वी से लगातार निर्देश मिलने के बिना, उन्हें सही स्थिति में लाने और जोड़ने में मदद करती हैं।
स्पाडेक्स ने 20 अप्रैल 2025 को दूसरी स्वचालित डॉकिंग का प्रदर्शन किया। इस दौरान दोनों यानों के बीच विद्युत शक्ति का हस्तांतरण भी किया गया और डॉकिंग के बाद उन्हें अलग करने की क्षमता जांची गई। ऐसे परीक्षण भविष्य में कई यानों से जुड़े अभियानों और कक्षा में बड़ी संरचनाओं के निर्माण या संचालन के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
दोनों उपग्रहों का पुनः प्रवेश और भविष्य के अभियान
एसडीएक्स01 ने 12 अक्टूबर को 16:08 यूटीसी पर ऑस्ट्रेलिया के पश्चिम में दक्षिणी हिंद महासागर के ऊपर वायुमंडल में प्रवेश किया। एसडीएक्स02 ने उसी दिन 23:05 यूटीसी पर अलेउतियन द्वीपसमूह के दक्षिण में उत्तरी प्रशांत क्षेत्र के ऊपर पुनः प्रवेश किया। भारतीय मानक समय के अनुसार ये समय क्रमशः 12 अक्टूबर रात 9:38 बजे और 13 अक्टूबर सुबह 4:35 बजे थे।
डॉकिंग तकनीक भारत के प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और चंद्रयान-4 जैसे भावी अभियानों के लिए अहम है। चंद्रयान-4 का लक्ष्य चंद्रमा से नमूने पृथ्वी पर लाना है। ऐसे जटिल अभियानों में अंतरिक्ष यानों को कक्षा में जोड़ने और अलग करने की क्षमता की जरूरत पड़ सकती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय मानक समय, समन्वित सार्वभौमिक समय से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।
- पीएसएलवी इसरो द्वारा विकसित भारतीय प्रक्षेपण यान है।
- श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र का स्थान है।
- अलेउतियन द्वीपसमूह उत्तरी प्रशांत महासागर में है और अलास्का से पश्चिम की ओर फैला है।
स्पाडेक्स के परीक्षणों ने भारत को कक्षा में यानों के स्वचालित जुड़ाव, ऊर्जा हस्तांतरण और पृथक्करण की क्षमता प्रदर्शित करने में सक्षम बनाया। यह कौशल देश के आगामी मानवयुक्त और गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए आधार तैयार करेगा।