सेबी का नया मीटर ऋण प्रतिभूतियों के जोखिम को करेगा स्पष्ट

सेबी का नया मीटर ऋण प्रतिभूतियों के जोखिम को करेगा स्पष्ट

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने निर्दिष्ट ऋण प्रतिभूतियों के लिए रंग-आधारित ‘क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर’ अनिवार्य किया है। 7 अक्टूबर 2026 के परिपत्र के अनुसार, यह व्यवस्था निवेशकों को ऋण प्रतिभूतियों से जुड़े चूक जोखिम को सरल दृश्य संकेत के रूप में समझने में मदद करेगी। इसमें एएए से डी तक की ऋण रेटिंग को छह जोखिम स्तरों में दिखाया जाएगा।

रेटिंग को जोखिम संकेत में बदलने की पहल

ऋण जोखिम का अर्थ है कि कोई उधारकर्ता या प्रतिभूति जारी करने वाली संस्था अपने कर्ज की अदायगी करने में विफल हो सकती है। ऋण रेटिंग किसी साधन की ऋण चुकाने की क्षमता और उससे जुड़े चूक जोखिम का आकलन करती है, लेकिन यह भुगतान की गारंटी नहीं होती। नया मीटर मौजूदा रेटिंग को ‘सबसे कम ऋण जोखिम’ से लेकर ‘चूक का उच्च से अत्यधिक उच्च जोखिम’ तक के छह स्तरों में प्रस्तुत करेगा।

सेबी के ढांचे में अलग-अलग स्तरों के लिए किन विशिष्ट रंगों का उपयोग होगा, इसका विवरण नहीं दिया गया है। यदि किसी प्रतिभूति की एक से अधिक रेटिंग हैं, तो मीटर में सबसे कम रेटिंग के आधार पर जोखिम दिखाना होगा। जारीकर्ता चाहें तो इसके साथ सभी रेटिंग भी बता सकते हैं। यदि जारीकर्ता को ‘जारीकर्ता सहयोग नहीं कर रहा’ (आईएनसी) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, तो मीटर को इसके लिए निर्धारित अलग क्षेत्र की ओर संकेत करना होगा।

किन प्रतिभूतियों और मंचों पर लागू होगा नियम

यह व्यवस्था सूचीबद्ध और प्रस्तावित गैर-परिवर्तनीय प्रतिभूतियों, वाणिज्यिक पत्रों, प्रतिभूतिकृत ऋण साधनों, सुरक्षा प्राप्तियों तथा संरचित ऋण या बाजार-संबद्ध डिबेंचरों पर लागू होगी। इसके दायरे में सार्वजनिक निर्गम और निजी नियोजन, दोनों माध्यमों से जारी प्रतिभूतियां शामिल हैं।

जारीकर्ताओं और ऑनलाइन बॉन्ड मंच प्रदाताओं को पेशकश दस्तावेजों, संक्षिप्त विवरण-पत्रों, निजी नियोजन ज्ञापन और विज्ञापनों में मीटर प्रमुखता से दिखाना होगा। इसे उनकी वेबसाइट और मोबाइल मंचों पर भी प्रदर्शित करना जरूरी होगा। असुरक्षित ऋण साधनों के मामले में मीटर के नीचे ‘असुरक्षित’ शब्द मोटे लाल अक्षरों में लिखना होगा, ताकि निवेशक इस विशेषता को आसानी से पहचान सकें।

अपडेट की समय-सीमा और निवेशक सावधानी

जमा-रक्षक संस्थाओं जैसे एनएसडीएल या सीडीएसएल से रेटिंग में बदलाव की सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर ऑनलाइन बॉन्ड मंच प्रदाताओं को मीटर अद्यतन करना होगा। परिपत्र की तारीख से 45 दिन बाद ये आवश्यकताएं लागू होंगी। इससे डिजिटल मंचों पर उपलब्ध जोखिम जानकारी में बदलाव को समय पर दिखाने की व्यवस्था बनेगी।

सेबी ने स्पष्ट किया है कि यह मीटर केवल ऋण जोखिम बताता है और निवेश सलाह नहीं है। किसी प्रतिभूति में बाजार जोखिम और तरलता जोखिम भी हो सकते हैं, जो ऋण जोखिम से अलग हैं। इसलिए केवल मीटर देखकर निवेश का निर्णय लेना पर्याप्त नहीं होगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सेबी एक वैधानिक नियामक है, जिसकी स्थापना भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के तहत हुई।
  • एनएसडीएल और सीडीएसएल प्रतिभूतियों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखने वाली जमा-रक्षक संस्थाएं हैं।
  • वाणिज्यिक पत्र पात्र संस्थाओं द्वारा जारी किया जाने वाला अल्पकालीन मुद्रा-बाजार साधन है।
  • निजी नियोजन में प्रतिभूतियां आम जनता के बजाय चुनिंदा व्यक्तियों के समूह को जारी की जाती हैं।

क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर का उद्देश्य जटिल रेटिंग को अधिक सहज रूप में सामने लाना है। हालांकि, निवेशकों को इसे जोखिम समझने का एक संकेत मानना चाहिए, न कि प्रतिफल या भुगतान की निश्चितता।

Originally written on October 13, 2026 and last modified on October 13, 2026.

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