सेंगोल के शिल्पकार वुम्मिडी एथिराज का निधन
ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले आभूषण व्यवसायी वुम्मिडी एथिराज का 21 अक्टूबर 2026 को चेन्नई में 99 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका जन्म 25 नवंबर 1926 को हुआ था। वह वुम्मिडी परिवार के प्रमुख थे, जो 125 वर्ष पुराने वुम्मिडी बंगारू ज्वेलर्स का संचालन करता है।
सेंगोल निर्माण से जुड़ी विरासत
एथिराज उस परिवार से जुड़े थे, जिसकी आभूषण फर्म ने भारत के ऐतिहासिक सेंगोल का निर्माण किया था। चांदी से बना और सोने की परत चढ़ा यह राजदंड 1947 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र भारत को सत्ता हस्तांतरण से जुड़ा है। सेंगोल तमिल भाषा का शब्द है और इसे न्यायपूर्ण या धर्मसम्मत शासन की अवधारणा से जोड़ा जाता है।
वुम्मिडी एथिराज अपने सौवें जन्मदिन से करीब एक महीने पहले चल बसे। उनके परिवार में उनकी संतान विजया भारती, उदय कुमार वुम्मिडी और विजयेंद्रन वुम्मिडी हैं। उनकी पत्नी सुमित्रा वुम्मिडी का उनसे पहले निधन हो गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
नए संसद भवन में सेंगोल का स्थान
28 मई 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर सेंगोल को लोकसभा कक्ष में स्थापित किया था। इसे लोकसभा अध्यक्ष की आसंदी के निकट रखा गया है। इस स्थापना ने सेंगोल को भारत के संसदीय परिसर में एक प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में स्थान दिया।
लोकसभा भारतीय संसद का निचला सदन है, जबकि राज्यसभा उच्च सदन है। सेंगोल की स्थापना को 1947 के सत्ता हस्तांतरण से जुड़ी स्मृति को नए संसद भवन में दर्शाने के रूप में देखा जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सेंगोल चांदी का राजदंड है, जिस पर सोने की परत चढ़ी है।
- ऐतिहासिक सेंगोल का निर्माण वुम्मिडी ज्वेलर्स ने किया था।
- सेंगोल 28 मई 2023 को नए संसद भवन के लोकसभा कक्ष में स्थापित किया गया।
- वुम्मिडी एथिराज का जन्म 25 नवंबर 1926 को हुआ और निधन 21 अक्टूबर 2026 को हुआ।
एथिराज का योगदान उस शिल्प परंपरा से जुड़ा रहा, जिसने स्वतंत्रता और न्यायपूर्ण शासन के प्रतीक सेंगोल को आकार दिया। नए संसद भवन में इसकी मौजूदगी उस ऐतिहासिक स्मृति को वर्तमान से जोड़ती है।