देवदास चिमाकोडे को कर्नाटक जनपद सम्मान
कर्नाटक के लोक कलाकार देवदास चिमाकोडे को 21 अक्टूबर 2026 को वर्ष 2026 के कर्नाटक जनपद अकादमी के वार्षिक मानद पुरस्कार के लिए चुना गया। बीदर जिले के चिमाकोड गांव के रहने वाले चिमाकोडे लोकगायन, वाद्य संगीत और पारंपरिक लोककलाओं में 35 वर्षों से सक्रिय हैं। यह राज्यस्तरीय सम्मान कर्नाटक की लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने में उनके योगदान को मान्यता देता है।
लोककलाओं में योगदान के लिए सम्मान
चिमाकोडे की पहचान लोकगायन और वाद्य संगीत के साथ सुग्गी कुनिता तथा हळगे से जुड़े कलाकार के रूप में है। सुग्गी कुनिता कर्नाटक का एक लोकनृत्य रूप है, जबकि हळगे लोकवाद्य संगीत से संबंधित है। इन विविध कला रूपों में उनकी सक्रियता को पुरस्कार के लिए चयन का आधार बनाया गया है।
कर्नाटक जनपद अकादमी का वार्षिक मानद पुरस्कार पारंपरिक लोककलाओं में योगदान को सम्मानित करता है। इसके अंतर्गत चयनित कलाकार को 25,000 रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति-पत्र दिया जाता है। चिमाकोडे को मिला यह सम्मान उनके लंबे कलात्मक अनुभव के साथ-साथ गांवों में लोकपरंपराओं को जीवित रखने के प्रयासों की भी पहचान है।
गांवों तक पहुंचीं लोक परंपराएं
चिमाकोडे ने क्षेत्र के गांवों में लोककलाओं का प्रदर्शन और प्रसार किया है। लोकगीत, संगीत और नृत्य जैसी परंपराएं अक्सर समुदायों के अभ्यास तथा सांस्कृतिक जीवन के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती हैं। गांवों में इन कलाओं को प्रस्तुत करना उनके संरक्षण और पहचान बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
कर्नाटक जनपद अकादमी के सदस्य विजय कुमार सोनारे ने गांवों की लोकपरंपराओं के लिए चिमाकोडे के योगदान का उल्लेख किया। उनका चयन इस बात को रेखांकित करता है कि लोककला के संरक्षण में क्षेत्रीय कलाकारों और समुदायों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
कर्नाटक की लोककला परंपरा का महत्व
कर्नाटक की लोककलाओं में संगीत, नृत्य और अन्य प्रदर्शनकारी रूप शामिल हैं। सुग्गी कुनिता और हळगे जैसे कला रूप स्थानीय सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के विशिष्ट उदाहरण हैं। ऐसे कलाकार इन परंपराओं को मंचों और गांवों तक ले जाकर उन्हें निरंतर अभ्यास में बनाए रखते हैं। राज्यस्तरीय पुरस्कारों से कलाकारों के काम को सार्वजनिक पहचान मिलती है और पारंपरिक कलाओं के प्रति रुचि बढ़ाने का अवसर बनता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- देवदास चिमाकोडे कर्नाटक के बीदर जिले के चिमाकोड गांव से हैं।
- चयन के समय उनकी आयु 56 वर्ष थी और उन्हें लोककलाओं में 35 वर्षों का अनुभव था।
- वर्ष 2026 के कर्नाटक जनपद अकादमी मानद पुरस्कार में 25,000 रुपये और प्रशस्ति-पत्र दिया जाता है।
- चिमाकोडे को लोकगायन, वाद्य संगीत, सुग्गी कुनिता और हळगे से जुड़े योगदान के लिए चुना गया।
चिमाकोडे का चयन कर्नाटक की पारंपरिक लोककलाओं और उन्हें गांवों में आगे बढ़ाने वाले कलाकारों के योगदान को सम्मानित करता है।