सांप के विष की पहचान में एआई सेंसर की नई पहल
भारतीय शोधकर्ताओं ने ऐसा प्रयोगशाला सेंसर विकसित किया है, जो तरल क्रिस्टल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से कोबरा तथा वाइपर के विष में अंतर कर सकता है। शोध के अनुसार, यह सेंसर लगभग चार मिनट में नमूने की पहचान करता है और इसकी दर्ज सटीकता 95 प्रतिशत रही।
तरल क्रिस्टल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का मेल
इस सेंसर में तरल क्रिस्टल से युक्त कपड़े की जाली का इस्तेमाल किया गया है। विष का नमूना जाली के संपर्क में आने पर उसके प्रकाशीय रूप में बदलाव होता है और अलग-अलग पैटर्न बनते हैं। इसके बाद MobileNetV3-Large नामक गहन शिक्षण मॉडल इन पैटर्नों का विश्लेषण करके नमूने को कोबरा या वाइपर के विष के रूप में वर्गीकृत करता है।
शोध में सेंसर ने प्रति मिलीलीटर 45 माइक्रोग्राम तक कम सांद्रता वाले दोनों प्रकार के विष का पता लगाया। अध्ययन ‘सेंसर्स एंड एक्ट्यूएटर्स ए: फिजिकल’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ। शोधपत्र में इसे कोबरा और वाइपर के विष के बीच त्वरित अंतर पहचानने की प्रयोगशाला-आधारित प्रणाली बताया गया है।
नतीजे उत्साहजनक, पर दायरा सीमित
95 प्रतिशत सटीकता और चार मिनट का पहचान समय इस तकनीक को आगे विकसित करने की संभावना दिखाते हैं। हालांकि, अभी के परिणाम केवल कोबरा और वाइपर के विष पर आधारित हैं। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सेंसर सभी सांपों की प्रजातियों या उनके विष की पहचान कर सकता है।
यह प्रणाली फिलहाल प्रयोगशाला में जांची गई है। अस्पतालों और अन्य चिकित्सा परिस्थितियों में इसकी उपयोगिता तथा विश्वसनीयता स्थापित करने के लिए आगे परीक्षण जरूरी होंगे। इसलिए इसे फिलहाल उपचार का विकल्प नहीं, बल्कि संभावित सहायक जांच तकनीक के रूप में देखना उचित है।
विष की पहचान और मात्रा मापना अलग काम
सांप के काटने के मामलों में एक अन्य तकनीक भी विकसित की गई है। सी-मेट थ्रिसूर और केरल बायो के शोधकर्ताओं का अलग जैव-सेंसर काटे जाने के बाद शरीर में पहुंची विष की मात्रा मापने के लिए बनाया गया है। इस जानकारी का उद्देश्य विषरोधी दवा की खुराक तय करने में मदद करना है। यह सेंसर तरल क्रिस्टल वाले एआई सेंसर से अलग है: पहला विष की मात्रा मापता है, जबकि दूसरा कोबरा और वाइपर के विष में भेद करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- तरल क्रिस्टल सेंसर में कपड़े की जाली और MobileNetV3-Large गहन शिक्षण मॉडल का उपयोग किया गया है।
- अध्ययन में पहचान की सटीकता 95 प्रतिशत और समय लगभग चार मिनट दर्ज किया गया।
- भारत का बहु-सांप विषरोधी उपचार भारतीय कोबरा, सामान्य करैत, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर के विष को लक्ष्य करता है।
- सी-मेट थ्रिसूर और केरल बायो का अलग जैव-सेंसर काटने के बाद शरीर में पहुंची विष की मात्रा मापने के लिए है।
नई तकनीकें विष की पहचान और उपचार संबंधी निर्णयों में सहायता कर सकती हैं, लेकिन उनका चिकित्सकीय उपयोग व्यापक परीक्षण और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के बाद ही तय होगा।