अन्नप्रणाली कैंसर के उपचार में टोरिपालिमैब को मंजूरी

अन्नप्रणाली कैंसर के उपचार में टोरिपालिमैब को मंजूरी

21 अक्टूबर 2026 को भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने टोरिपालिमैब दवा ज़ाइटोरवी को उन्नत अन्नप्रणाली कैंसर के उपचार में उपयोग की मंजूरी दी। इसे सिस्प्लैटिन और पैक्लिटैक्सेल के साथ उन वयस्कों के शुरुआती उपचार के रूप में दिया जा सकेगा, जिनका कैंसर शल्य चिकित्सा से नहीं निकाला जा सकता, दोबारा हुआ है या शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल चुका है।

अन्नप्रणाली के कैंसर में नई उपचार मंजूरी

अन्नप्रणाली गले से पेट तक भोजन पहुंचाने वाली पेशीय नली है। अन्नप्रणाली का स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (ईएससीसी) इसकी अंदरूनी परत की स्क्वैमस कोशिकाओं से विकसित होता है। भारत में अन्नप्रणाली के कैंसर के लगभग 80 प्रतिशत मामले इसी प्रकार के बताए जाते हैं।

‘शल्य चिकित्सा से न निकाला जा सकने वाला’ ट्यूमर वह होता है जिसे ऑपरेशन से हटाना संभव न हो। मेटास्टेटिक कैंसर में रोग शरीर के दूरस्थ हिस्सों तक फैल चुका होता है। शुरुआती उपचार से आशय बीमारी के लिए दिए जाने वाले प्रथम उपचार से है। भारत में इस दवा के उपयोग के लिए मरीजों का चयन पीडी-एल1 अभिव्यक्ति के आधार पर करना आवश्यक नहीं है।

प्रतिरक्षा तंत्र और कीमोथेरेपी का संयुक्त तरीका

टोरिपालिमैब एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी है, जो पीडी-1 नामक प्रतिरक्षा-नियंत्रण रिसेप्टर को लक्ष्य करती है। पीडी-1 को रोकने वाली दवाएं उस मार्ग को बाधित करती हैं जो कैंसर कोशिकाओं के विरुद्ध प्रतिरक्षा कोशिकाओं की गतिविधि को सीमित कर सकता है।

इसके साथ दी जाने वाली सिस्प्लैटिन प्लैटिनम-आधारित और पैक्लिटैक्सेल टैक्सेन वर्ग की कीमोथेरेपी दवाएं हैं। इस संयोजन में प्रतिरक्षा-आधारित उपचार और कीमोथेरेपी को साथ रखा गया है। ज़ाइटोरवी को भारत में इससे पहले नासोफैरिंजियल कार्सिनोमा के उपचार के लिए मंजूरी मिली थी; अन्नप्रणाली कैंसर इसका देश में दूसरा स्वीकृत उपयोग है।

परीक्षण के नतीजे और नियामकीय संदर्भ

मंजूरी का आधार तीसरे चरण का जुपिटर-06 परीक्षण है। इसमें टोरिपालिमैब और कीमोथेरेपी के संयोजन से बीमारी बढ़ने या मृत्यु का जोखिम केवल कीमोथेरेपी की तुलना में 42 प्रतिशत कम हुआ। संयोजन समूह में जीवित रहने की मध्य अवधि 17.7 महीने थी, जबकि केवल कीमोथेरेपी वाले समूह में यह 12.9 महीने रही। ये परीक्षण समूहों के औसत परिणाम हैं और किसी एक मरीज के परिणाम की भविष्यवाणी नहीं करते।

भारत में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों का राष्ट्रीय नियामक केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) है, जिसका नेतृत्व डीसीजीआई करते हैं। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज ने 2023 में जुनशी बायोसाइंसेज़ के साथ 21 देशों में टोरिपालिमैब के लाइसेंस और व्यावसायीकरण का समझौता किया था। इस दवा को अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के संबंधित नियामकों से भी मंजूरी मिल चुकी है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

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  • सीडीएससीओ भारत में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों का राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण है।
  • डीसीजीआई, सीडीएससीओ का प्रमुख होता है और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत नियामकीय कार्य करता है।
  • अमेरिका में खाद्य एवं औषधि प्रशासन, यूरोपीय संघ में यूरोपीय औषधि एजेंसी और ब्रिटेन में औषधि एवं स्वास्थ्य देखभाल उत्पाद नियामक एजेंसी संबंधित नियामक संस्थाएं हैं।
  • टोरिपालिमैब पीडी-1 अवरोधक दवा है, जबकि सिस्प्लैटिन और पैक्लिटैक्सेल कीमोथेरेपी दवाएं हैं।

यह मंजूरी उन्नत ईएससीसी के उपचार विकल्पों में एक नया संयोजन जोड़ती है। इसके परीक्षण-आधारित लाभों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि समूह के आंकड़े हर मरीज के व्यक्तिगत परिणाम की गारंटी नहीं देते।

Originally written on October 21, 2026 and last modified on October 21, 2026.

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