सद्दुला बथुकम्मा के साथ तेलंगाना के पुष्पोत्सव का समापन

सद्दुला बथुकम्मा के साथ तेलंगाना के पुष्पोत्सव का समापन

तेलंगाना का नौ दिवसीय बथुकम्मा उत्सव 18 अक्टूबर 2026 को सद्दुला बथुकम्मा के साथ संपन्न हुआ। हैदराबाद में हुसैन सागर झील के किनारे स्थित टैंक बंड पर हजारों महिलाएं पुष्प सज्जाओं के साथ अंतिम शोभायात्रा में शामिल हुईं। शाम चार बजे शहीद स्मारक से शुरू हुआ जुलूस टैंक बंड की ओर बढ़ा, जहां फूलों से बनी बथुकम्मा को जल में विसर्जित किया गया।

फूलों और लोकगीतों से जुड़ा नौ दिवसीय उत्सव

बथुकम्मा तेलंगाना का पारंपरिक पुष्पोत्सव है, जो हिंदू पंचांग के आश्वयुज मास में मनाया जाता है। यह अवधि आम तौर पर सितंबर या अक्टूबर में आती है और उत्सव नवरात्रि के समय के साथ पड़ता है। नौ दिनों तक महिलाएं मौसमी फूलों को गोलाकार परतों में सजाकर शंकु जैसी आकृति बनाती हैं, जिसे बथुकम्मा कहा जाता है। इसके चारों ओर एकत्र होकर पारंपरिक गीत गाए जाते हैं।

सजावट में तंगेडु और गुनुका जैसे फूलों का विशेष उपयोग होता है। तंगेडु को वनस्पति विज्ञान में कैसिया ऑरिकुलेटा और गुनुका को सेलोसिया कहा जाता है। अंतिम दिन की बथुकम्मा को सद्दुला बथुकम्मा नाम दिया गया है। इस दिन सजी हुई पुष्प आकृतियों को जुलूस में ले जाकर स्थानीय जलाशयों में विसर्जित किया जाता है।

हैदराबाद में आयोजन और जनभागीदारी

हैदराबाद में मुख्य आयोजन के साथ हैदराबाद महानगर विकास प्राधिकरण ने बथुकम्मा कार्निवाल भी आयोजित किया। इसमें तेलंगाना के भोजन और हस्तशिल्प के स्टॉल लगाए गए। 17 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने अंबरपेट नगरपालिका मैदान में 72 फुट ऊंची पुष्प बथुकम्मा का अनावरण किया। इस अवसर पर राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल मौजूद थे।

टैंक बंड के आयोजन में राज्य के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव और पंचायत राज मंत्री सीतक्का ने भी भाग लिया। राज्यपाल के साथ अभिनेता विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। भीड़ और शोभायात्रा को देखते हुए प्रशासन ने टैंक बंड तथा नेकलेस रोड के आसपास यातायात प्रतिबंध, मार्ग परिवर्तन और निर्धारित पार्किंग की व्यवस्था की।

लोककलाओं की प्रस्तुति और वैश्विक पहुंच

टैंक बंड पर करीब 700 लोक कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में पेरिनी, गुसाड़ी, ओग्गु डोलु और डप्पू जैसी तेलंगाना की पारंपरिक लोककलाएं दिखाई गईं। पेरिनी राज्य की पारंपरिक नृत्य शैली है, जबकि डप्पू लोक प्रस्तुतियों में इस्तेमाल होने वाला ताल वाद्य है। बथुकम्मा का आयोजन तेलुगु प्रवासी समुदायों ने मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित अन्य देशों में भी किया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • बथुकम्मा तेलंगाना का नौ दिनों तक चलने वाला पुष्पोत्सव है।
  • सद्दुला बथुकम्मा उत्सव का अंतिम दिन होता है।
  • तंगेडु और गुनुका बथुकम्मा सजाने में इस्तेमाल होने वाले फूल हैं।
  • टैंक बंड हैदराबाद में हुसैन सागर झील के किनारे स्थित सार्वजनिक मार्ग है।

बथुकम्मा में पुष्प सज्जा, गीत, लोककलाएं और सामुदायिक भागीदारी एक साथ दिखाई देती हैं। सद्दुला बथुकम्मा का विसर्जन इस सांस्कृतिक उत्सव का समापन करता है।

Originally written on October 19, 2026 and last modified on October 19, 2026.

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