वैश्विक व्यापार नियमों में समावेशिता पर भारत का जोर

वैश्विक व्यापार नियमों में समावेशिता पर भारत का जोर

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में ऐसे वैश्विक व्यापार नियमों का समर्थन दोहराया है जो समावेशी हों, विकास की जरूरतों को ध्यान में रखें और देशों के बीच कानूनी सामंजस्य को बढ़ावा दें। 20 अक्टूबर 2026 को राज्यसभा सांसद नवीन के. जैन ने महासभा की छठी समिति में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य दिया। यह समिति अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े प्रश्नों पर विचार करती है।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका

भारत ने संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून आयोग (यूएनसीआईटीआरएएल) के काम को रेखांकित किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1966 में इस आयोग की स्थापना की थी। यह अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक लेन-देन के नियमों में सामंजस्य लाने के लिए संधियां, आदर्श कानून और अन्य कानूनी साधन विकसित करता है। ऐसे साझा मानक व्यापार से जुड़े लेन-देन को अधिक स्पष्ट और पूर्वानुमेय बनाने में मदद करते हैं।

भारत का जोर इस बात पर रहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे विकसित और विकासशील—दोनों तरह के देशों की जरूरतों के अनुरूप हों। वक्तव्य में भारत में मध्यस्थता, वाणिज्यिक विवादों के निपटारे और दिवाला प्रक्रिया से जुड़े सुधारों का भी उल्लेख किया गया। ये प्रयास घरेलू स्तर पर व्यापारिक विवादों के समाधान और कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने से जुड़े हैं।

विश्व व्यापार संगठन में सुधार की मांग

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) 1995 में स्थापित हुआ और बहुपक्षीय व्यापार समझौतों के संचालन के साथ व्यापार वार्ताओं के लिए मंच प्रदान करता है। इसके नियमों में गैर-भेदभाव के सिद्धांत शामिल हैं, जैसे सर्वाधिक वरीयता प्राप्त राष्ट्र का व्यवहार और राष्ट्रीय व्यवहार। इन सिद्धांतों का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार में समान नियम लागू करना है।

19 अक्टूबर 2026 को भारत ने डब्ल्यूटीओ में सुधार, विवाद निपटान व्यवस्था बहाल करने और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में विकासशील देशों के हितों की रक्षा की मांग की। संगठन का अपीलीय निकाय 2019 से अपीलों की सुनवाई नहीं कर पा रहा है, क्योंकि रिक्तियों के कारण वह आवश्यक सदस्य संख्या पूरी नहीं कर सका। भारत ने जुलाई 2026 में अपनी आठवीं व्यापार नीति समीक्षा के दौरान पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण व्यवस्था के समर्थन को भी दोहराया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 2 अक्टूबर को विकासशील देशों के लिए नीतिगत गुंजाइश बनाए रखने पर बल दिया।

भारत के व्यापारिक हित और क्षेत्रीय साझेदारी

भारत का रुख बहुपक्षीय नियमों के साथ-साथ व्यापारिक साझेदारियों में उसकी सक्रियता को भी दर्शाता है। 26 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र से इतर भारत और खाड़ी सहयोग परिषद ने अपनी संयुक्त कार्ययोजना की समीक्षा की और मुक्त व्यापार समझौते के लिए वार्ता शुरू की। वित्त वर्ष 2025–26 में भारत और खाड़ी सहयोग परिषद के बीच व्यापार 178.66 अरब डॉलर रहा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून आयोग की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1966 में की थी।
  • विश्व व्यापार संगठन की स्थापना 1995 में हुई थी और यह बहुपक्षीय व्यापार समझौतों का संचालन करता है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा की छह मुख्य समितियां हैं; छठी समिति कानूनी मामलों पर विचार करती है।
  • डब्ल्यूटीओ की विवाद निपटान व्यवस्था विवाद निपटान समझौते के तहत संचालित होती है।

भारत का संदेश है कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में साझा नियमों के साथ विकासशील देशों की नीतिगत जरूरतों और प्रभावी विवाद समाधान को भी जगह मिलनी चाहिए।

Originally written on October 20, 2026 and last modified on October 20, 2026.

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