वैश्विक वृद्धि अनुमान में भारत सबसे आगे, WEF सर्वे में मजबूत भरोसा
विश्व आर्थिक मंच (WEF) के सितंबर 2026 के Chief Economists’ Outlook में भारत को वैश्विक वृद्धि परिदृश्य में शीर्ष स्थान मिला है। अगस्त 2026 के सर्वे पर आधारित इस आकलन में प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने भारत की आर्थिक गति, घरेलू आय और कारोबारी माहौल को लेकर अपेक्षाकृत मजबूत भरोसा जताया है।
भारत को लेकर अर्थशास्त्रियों की सकारात्मक राय
सर्वे के अनुसार, 98% प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने अगले 12 महीनों में भारत में मध्यम या उससे अधिक वृद्धि की उम्मीद जताई। इनमें से लगभग 74% ने मजबूत या बहुत मजबूत वृद्धि की संभावना बताई, जबकि मई 2026 के सर्वे में यह आंकड़ा 52% था। यह बदलाव दर्शाता है कि भारत को लेकर वैश्विक आर्थिक धारणा पहले की तुलना में और बेहतर हुई है।
WEF ने अगस्त 2026 में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर दिया था। यह अनुमान घरेलू मांग, निवेश गतिविधियों और अपेक्षाकृत स्थिर आर्थिक माहौल की भूमिका को रेखांकित करता है।
अन्य क्षेत्रों की तुलना में भारत की स्थिति
सर्वे में चीन की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर रही, जहां लगभग हर तीन में से एक अर्थशास्त्री ने कमजोर वृद्धि की आशंका जताई। यूरोप को सर्वे में सबसे कमजोर क्षेत्र माना गया। इसके विपरीत, भारत उन केवल दो क्षेत्रों में शामिल रहा, जहां बहुमत ने अगले एक वर्ष में मुद्रास्फीति-समायोजित घरेलू आय बढ़ने की उम्मीद जताई।
हालांकि, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए अनुकूल कारोबारी माहौल के मामले में भारत की रैंकिंग दूसरी से चौथी जगह पर आ गई। इसका अर्थ यह है कि निवेश आकर्षण बना हुआ है, लेकिन प्रतिस्पर्धा और नीतिगत सुधारों की गति पर नजर बनी हुई है।
सर्वे का महत्व और जीके तथ्य
Chief Economists’ Outlook WEF की एक नियमित सर्वे रिपोर्ट है, जिसमें प्रमुख अर्थशास्त्री वृद्धि, मुद्रास्फीति, श्रम बाजार और क्षेत्रीय प्रदर्शन जैसे मुद्दों पर अपनी अपेक्षाएं साझा करते हैं। ऐसे सर्वे वैश्विक आर्थिक दिशा समझने में उपयोगी माने जाते हैं, क्योंकि इनमें आने वाले महीनों की कारोबारी और नीतिगत धारणा झलकती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- विश्व आर्थिक मंच (WEF) का मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है।
- Chief Economists’ Outlook में GDP, मुद्रास्फीति और रोजगार से जुड़ी अपेक्षाओं का आकलन किया जाता है।
- भारत में वित्त वर्ष 2026-27 की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक है।
- घरेलू मांग का अर्थ है अर्थव्यवस्था के भीतर परिवारों, कंपनियों और सरकार द्वारा किया गया खर्च।
सर्वे में ऊर्जा कीमतों को भारत की वृद्धि संभावनाओं पर असर डालने वाला कारक बताया गया है, जबकि भू-राजनीतिक तनावों को वैश्विक अनिश्चितता का बड़ा स्रोत माना गया है। कुल मिलाकर, यह आकलन भारत की आर्थिक मजबूती और वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती विश्वसनीयता को दर्शाता है।