विशाखापत्तनम में मरीन गैस टरबाइन कॉम्प्लेक्स

विशाखापत्तनम में मरीन गैस टरबाइन कॉम्प्लेक्स

भारत फोर्ज ने अपने एयरोस्पेस कारोबार के माध्यम से 19 मई 2026 को आंध्र प्रदेश सरकार के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत विशाखापत्तनम में भारत का पहला निजी क्षेत्र आधारित मरीन गैस टरबाइन मरम्मत, ओवरहॉल और स्वदेशी विकास कॉम्प्लेक्स स्थापित किया जाएगा। यह परियोजना आंध्र प्रदेश डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के अंतर्गत लगभग 80 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी।

मरीन गैस टरबाइन का महत्व

मरीन गैस टरबाइन ऐसे इंजन होते हैं जिनका उपयोग नौसैनिक जहाजों और समुद्री प्लेटफॉर्म में किया जाता है। ये उच्च शक्ति-से-भार अनुपात, कम आकार और तेज गति से संचालन की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। आधुनिक युद्धपोतों और तेज नौसैनिक जहाजों में इनका व्यापक उपयोग होता है क्योंकि ये कम स्थान में अधिक शक्ति प्रदान करते हैं।

दो चरणों में विकसित होगी परियोजना

यह कॉम्प्लेक्स दो चरणों में तैयार किया जाएगा। पहले चरण में मरम्मत और ओवरहॉल सुविधा विकसित की जाएगी, जिसमें हॉट सेक्शन रिस्टोरेशन, कंपोनेंट निर्माण और विशाखापत्तनम स्थित नेवल डॉकयार्ड के लिए 72 घंटे का त्वरित सेवा प्रावधान शामिल होगा। दूसरे चरण में भारत का पहला निजी क्षेत्र आधारित मरीन गैस टरबाइन डेवलपमेंट और असेंबली हॉल बनाया जाएगा। इसमें स्वदेशी विकास और परीक्षण के लिए हॉट टेस्ट सेल भी स्थापित किया जाएगा। यह कदम भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन नीति को मजबूती देगा।

रक्षा औद्योगिक गलियारे का महत्व

आंध्र प्रदेश डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर भारत के प्रमुख रक्षा औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे कॉरिडोर रक्षा उपकरणों के निर्माण, परीक्षण और एकीकरण के लिए विशेष रूप से विकसित किए जाते हैं। इनका उद्देश्य सार्वजनिक और निजी निवेश को बढ़ावा देकर रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। विशाखापत्तनम भारतीय नौसेना का एक प्रमुख बेस है और यहां पूर्वी नौसेना कमान मुख्यालय स्थित है। परियोजना का स्थान नेवल डॉकयार्ड, आईएनएस एक्सिला और ईस्टर्न नेवल कमांड मुख्यालय के निकट होगा, जिससे रणनीतिक महत्व और बढ़ जाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

” विशाखापत्तनम भारतीय नौसेना का प्रमुख समुद्री अड्डा है। ” आईएनएस एक्सिला भारतीय नौसेना के मरीन इंजीनियरिंग और प्रोपल्शन प्रशिक्षण से जुड़ा संस्थान है। ” मरीन गैस टरबाइन उच्च शक्ति उत्पादन और कॉम्पैक्ट डिजाइन के लिए उपयोग किए जाते हैं। ” भारत में उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक गलियारे भी स्थापित किए गए हैं। इस परियोजना से लगभग 750 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। साथ ही यह केंद्र भारतीय नौसेना के अलावा मित्र देशों की नौसेनाओं के लिए भी मरम्मत और ओवरहॉल हब के रूप में कार्य कर सकेगा। इससे भारत की रक्षा तकनीक और समुद्री रणनीतिक क्षमता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

Originally written on May 19, 2026 and last modified on May 19, 2026.

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